April 24, 2026

1000 दिन तक रुका नहीं खून… आखिर क्या है उस महिला की रहस्यमयी बीमारी का सच?

अमेरिका की एक टिकटॉक यूजर पोपी ने अपने साथ घटी एक ऐसी हैरान कर देने वाली घटना साझा की है, जिसे जानकर किसी का भी सिर चकरा जाए। पोपी ने खुलासा किया कि उसे लगातार करीब 1000 दिन यानी लगभग तीन साल तक पीरियड्स होते रहे — और इस खतरनाक अनुभव ने उसकी ज़िंदगी पूरी तरह बदलकर रख दी।

दो हफ्तों की ब्लीडिंग से शुरू हुआ तीन साल का संघर्ष

पोपी ने अपने टिकटॉक वीडियो में बताया कि यह सब उस वक्त शुरू हुआ, जब उसे दो हफ्तों तक लगातार ब्लीडिंग हुई। पहले तो उसने सोचा कि यह शायद हार्मोनल बदलाव की वजह से हो सकता है, लेकिन जब ब्लीडिंग बंद नहीं हुई, तो वह डॉक्टरों के पास गई। कई मेडिकल चेकअप, दवाइयों और टेस्ट्स के बावजूद उसकी हालत जस की तस बनी रही।

डॉक्टरों ने पीसीओएस (PCOS), ओवरी सिस्ट और अन्य संभावनाओं पर जांच की, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। पोपी ने बताया कि उसका आयरन लेवल बेहद गिर चुका था, उसे शरीर में ऐंठन, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द, लगातार सिरदर्द और मतली जैसी समस्याएं झेलनी पड़ीं।

इलाज में झोंक दी पूरी जमा-पूंजी

लगातार ब्लीडिंग की वजह से पोपी को शारीरिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक और मानसिक रूप से भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। उसने बताया, “मैंने अपनी जीवनभर की कमाई पैड्स, पैंट्स, अंडरवियर और बेडशीट्स पर खर्च कर दी है।”

डॉक्टरों ने हिस्टेरोस्कोपी, MRI और अल्ट्रासाउंड तक किया, लेकिन हर बार नतीजा शून्य ही रहा। आईयूडी (Intrauterine Device) लगाने के बाद भी ब्लीडिंग नहीं रुकी।

आखिरकार सामने आया असली कारण: दिल के आकार का गर्भाशय

लगभग 950 दिनों की पीड़ा के बाद पोपी को ‘बाइकॉर्नुएट यूट्रस’ (Bicornuate Uterus) नाम की एक दुर्लभ स्थिति के बारे में पता चला, जो आम भाषा में ‘दिल के आकार का गर्भाशय’ भी कहा जाता है। इस स्थिति में गर्भाशय पूरी तरह विकसित नहीं होता और दो भागों में बंटा होता है, जिससे हार्मोनल असंतुलन और अनियमित पीरियड्स जैसी समस्याएं होती हैं।

पोपी ने बताया कि इस बारे में उसे किसी डॉक्टर ने नहीं बताया, बल्कि एक अन्य टिकटॉक यूजर की मदद से उसे इस दुर्लभ कंडीशन की जानकारी मिली।

अब होगा बड़ा ऑपरेशन

अब पोपी की योजना है कि वह एक विशेष हार्मोनल पैनल टेस्ट कराएंगी, जिससे हार्मोन स्तर की विस्तृत जांच होगी और आईयूडी हटाया जाएगा। साथ ही, डॉक्टर गर्भाशय की परत से असामान्य टिश्यू को हटाने के लिए एक सर्जिकल प्रक्रिया भी कर सकते हैं।

यह मामला न केवल एक स्त्री रोग संबंधी जटिलता की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि इस बात को भी उजागर करता है कि कैसे कभी-कभी सोशल मीडिया भी किसी को उनके जीवन की सबसे बड़ी बीमारी का सच बताने में मददगार बन सकता है।

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