May 3, 2026

लेबनान में अमेरिका की रणनीति नाकाम, हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई से सेना का इनकार

ह को निशस्त्र करने की अमेरिकी कोशिशें लगातार विफल हो रही हैं। बीते दो हफ्तों के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधियों द्वारा की गई उच्चस्तरीय मुलाकातों और दबाव के बावजूद लेबनानी सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगी। यह स्थिति वॉशिंगटन के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका क्षेत्र में शांति के नाम पर हिजबुल्लाह को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा था।

 

17 अगस्त को अमेरिकी प्रतिनिधि थॉमस बैरक और मॉर्गन ऑर्टेगस ने बेरूत में राष्ट्रपति जोसेफ औन, प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और संसद अध्यक्ष नबीह बेरी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सेना प्रमुख जनरल रोडोल्फ हेकल से सीधा सवाल किया कि क्या सेना हिजबुल्लाह को हथियार छोड़ने पर मजबूर कर सकती है। लेकिन जनरल हेकल ने स्पष्ट कर दिया कि सेना कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगी जिससे देश की आंतरिक स्थिरता और शांति को खतरा हो। सेना का यह रुख अमेरिकी नीति के लिए बड़ा अवरोध बनकर उभरा है।

 

लेबनानी सरकार ने हाल ही में एक रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत 2026 तक हिजबुल्लाह को निशस्त्र करने की योजना बनाई गई है। लेकिन इस योजना को लेकर सरकार खुद भी असमंजस में है। शिया समुदाय, जो हिजबुल्लाह का मजबूत आधार है, ने इस योजना का तीखा विरोध किया है। कई धार्मिक और राजनीतिक समूहों ने यहां तक कहा है कि वे अपने हथियारों की रक्षा के लिए ‘कर्बला जैसी लड़ाई’ लड़ने को तैयार हैं। इससे सरकार की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं और राजनीतिक हालात और अधिक जटिल हो गए हैं।

 

इस पूरे घटनाक्रम पर देश के प्रमुख शिया धर्मगुरु जाफरी मुफ्ती अहमद कबालान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे गए संदेश में चेताया कि हिजबुल्लाह को कमजोर करने की किसी भी कोशिश से देश में अशांति फैल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि हिजबुल्लाह के हथियार लेबनान की सुरक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें खत्म करना देश को जोखिम में डालना होगा। उनके इस बयान को हिजबुल्लाह के प्रति समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

 

वहीं दूसरी ओर, इजराइल ने भी दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत कर दिया है। इजराइली सेना प्रमुख एयाल जामिर ने साफ कर दिया है कि उनकी सेना कब्जाए गए इलाकों से पीछे नहीं हटेगी। इस रुख ने लेबनान की सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अमेरिकी दूतों ने बातचीत में यह कहा कि इजराइल को भी अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना होगा, लेकिन लेबनानी नेतृत्व को इन आश्वासनों पर भरोसा नहीं है। उन्हें याद है कि पिछले साल अमेरिकी शांति प्रयासों के दौरान ही हिजबुल्लाह के वरिष्ठ कमांडर फौआद शुकर और संगठन प्रमुख सैय्यद हसन नसरल्लाह मारे गए थे।

 

इस पूरी स्थिति से स्पष्ट है कि लेबनान में अमेरिका की रणनीति उलझ गई है। न तो सेना उसका साथ देने को तैयार है, न सरकार निर्णायक रुख अपना पा रही है और न ही हिजबुल्लाह को कमजोर करने की कोई भी कोशिश सफल होती दिख रही है। इसके विपरीत, अमेरिका का दबाव हिजबुल्लाह और उसके सहयोगियों को और अधिक संगठित और मुखर बना रहा है, जिससे वाशिंगटन की पश्चिम एशिया नीति को गंभीर चुनौती मिल रही है।

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