भारत-अमेरिका के बीच बड़ी ट्रेड डील जल्द तय, व्हाइट हाउस ने जताया भरोसा – मोदी-ट्रंप की दोस्ती आई चर्चा में
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध एक बार फिर नए मुकाम की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। व्हाइट हाउस ने सोमवार को स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण ट्रेड डील अपने अंतिम चरण में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गहरी मित्रता का हवाला देते हुए, व्हाइट हाउस ने भारत को “रणनीतिक साझेदार” बताया और संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच यह व्यापार समझौता कभी भी घोषित किया जा सकता है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिना लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि भारत और अमेरिका एक ट्रेड डील के बेहद करीब हैं, और यह बात अब भी पूरी तरह सच है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अभी-अभी अमेरिकी वाणिज्य सचिव से इस विषय पर बातचीत की है, जो राष्ट्रपति के साथ ओवल ऑफिस में मौजूद थे और समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।
प्रेस सचिव के अनुसार, इस डील की घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है। भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का एक बेहद अहम और रणनीतिक सहयोगी बताया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों को और गहराई देना चाहते हैं और आने वाले समय में उनसे जुड़ी घोषणाएं सुनने को मिलेंगी।
इससे पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ नामक कार्यक्रम के दौरान इस बात का संकेत दिया था कि भारत के साथ एक “बड़ी ट्रेड डील” जल्द होगी। उन्होंने यह भी बताया था कि अमेरिका ने हाल ही में चीन के साथ समझौता किया है और अब भारत के साथ भी कुछ वैसा ही किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने 2 अप्रैल को करीब 100 से ज्यादा देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ (प्रतिदान शुल्क) लगाने की घोषणा की थी। हालांकि बाद में 9 अप्रैल को चीन को छोड़कर अन्य देशों पर यह टैरिफ अस्थायी तौर पर 90 दिनों के लिए टाल दिया गया और अंततः चीन को भी इसमें राहत दी गई। इसके बाद अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौता तय हो चुका है, और अब बारी भारत की है।
दोनों देशों के बीच यह व्यापार समझौता न सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा देगा, बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को भी और मज़बूती प्रदान करेगा। अब नजर इस बात पर है कि यह डील कब औपचारिक रूप से सामने आती है और इसमें किन प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है।
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