April 30, 2026

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: 8 जुलाई से पहले अंतरिम डील की उम्मीद

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को 8 जुलाई से पहले अंतिम रूप दिया जा सकता है। बातचीत में भारत ने 10% बेसलाइन टैरिफ के साथ अमेरिका द्वारा लगाए गए 26% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने की शर्त रखी है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया था, जिसमें भारत पर भी यह अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था। हालांकि बाद में इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया गया, जो अवधि 9 जुलाई को समाप्त हो रही है। इस बीच सभी देशों से आयात पर 10% बेसलाइन टैरिफ लागू है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत अपने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर की सुरक्षा चाहता है। इसके लिए वह आयात कोटा या न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) लागू कर सकता है। भारत की ओर से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल हाल ही में वाशिंगटन में अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर से मिले। दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच बातचीत 22 मई तक चलने की योजना है। भारत चाहता है कि उस पर न तो 10% बेसलाइन टैरिफ और न ही 26% अतिरिक्त टैरिफ लागू हो।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फरवरी में अमेरिका दौरे के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप से मिल चुके हैं। तब दोनों नेताओं ने सितंबर-अक्टूबर 2025 तक पूर्ण व्यापार समझौता और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया था।

भारत ने लेबर इंटेंसिव सेक्टर जैसे टेक्सटाइल, गारमेंट, जेम्स एंड ज्वैलरी, लेदर गुड्स, प्लास्टिक, केमिकल, श्रिंप, तिलहन, अंगूर और केला के लिए टैरिफ में छूट की मांग की है। वहीं अमेरिका कुछ औद्योगिक वस्तुएं, ऑटोमोबाइल (विशेषकर ईवी), वाइन, पेट्रोलियम पदार्थ, डेयरी, सेब और ड्राई फ्रूट जैसे खाद्य और जीएम उत्पादों में छूट चाहता है। भारत में जीएम खाद्य पदार्थों के आयात पर प्रतिबंध है, जिससे इस विषय पर बातचीत में गतिरोध बना हुआ है। हालांकि भारत नॉन-जीएम पशु चारा ‘अल्फा अल्फा हे’ के आयात पर सहमत हो गया है।

वर्तमान में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच 131.84 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जिसमें भारत ने 18% निर्यात अमेरिका को किया जबकि आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 6.22% रही। भारत अमेरिका के साथ व्यापार सरप्लस की स्थिति में है। वर्ष 2024-25 में यह सरप्लस 41.18 अरब डॉलर रहा। पिछली चार वर्षों में भी यह लगातार बढ़ा है, जिससे राष्ट्रपति ट्रंप कई बार अमेरिका के व्यापार घाटे पर चिंता जता चुके हैं।

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