May 5, 2026

बाढ़ जैसी आपदाओं में कितना कारगर है ड्रोन और AI का इस्तेमाल? जानिए फायदे और चुनौतियां

बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं हर साल हजारों लोगों को प्रभावित करती हैं। इस स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को तेजी से और सटीक ढंग से अंजाम देना बेहद जरूरी होता है। हाल के वर्षों में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों ने आपदा प्रबंधन में अपनी उपयोगिता साबित की है, लेकिन इसके साथ ही कई बड़ी चुनौतियां भी सामने आई हैं।

ड्रोन की बात करें तो यह ऊपर से उड़कर हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें लेने में सक्षम होते हैं। एक सामान्य उड़ान के दौरान ड्रोन 800 से ज्यादा तस्वीरें ले सकता है। अगर ऐसी 10 उड़ानें हों, तो हजारों तस्वीरें मिल सकती हैं। इन तस्वीरों को इंसानों द्वारा देखना और विश्लेषण करना काफी समय लेने वाला होता है। वहीं, AI तकनीक इन तस्वीरों को कुछ ही सेकंड में स्कैन करके उन तस्वीरों की पहचान करता है जिनमें पीड़ितों के होने की संभावना ज्यादा होती है।

हालांकि, AI और ड्रोन के इस तालमेल में कई कमियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती है बाढ़ पीड़ितों की पहचान करना। मलबे, पानी और कीचड़ में दबे लोग कैमरे में साफ नजर नहीं आते, जिससे AI को उनकी पहचान करने में कठिनाई होती है। इसके अलावा, AI को प्रशिक्षित करने के लिए आवश्यक डेटा की कमी भी एक गंभीर समस्या है। बाढ़ पीड़ितों की पर्याप्त हवाई तस्वीरें उपलब्ध नहीं हैं, जिससे AI की सटीकता पर असर पड़ता है।

एक और अहम समस्या GPS से जुड़ी है। ड्रोन की तस्वीरें अक्सर तिरछी होती हैं, जिससे उनकी लोकेशन सटीक नहीं होती। इस वजह से बचाव टीमें कई बार गलत जगह पर पहुंच जाती हैं।

फिर भी, रिसर्चर्स का मानना है कि अगर इंसानों और AI के बीच सही तालमेल बना लिया जाए, तो राहत कार्य काफी प्रभावी हो सकते हैं। AI उन जगहों की पहचान कर सकता है जहां मानवीय गतिविधियों के संकेत मिलते हैं—जैसे सीधी रेखाएं, कृत्रिम रंग या संरचनात्मक कोने। ऐसे स्थानों को प्राथमिकता देकर सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमें ज्यादा तेजी से पीड़ितों तक पहुंच सकती हैं।

आखिर में, विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक अभी परिपक्व नहीं हुई है, लेकिन यह एक मजबूत शुरुआत है। अगर GPS को और सटीक बनाया जाए और ट्रेनिंग डेटा में सुधार हो, तो ड्रोन और AI मिलकर बाढ़ जैसी आपदाओं में हजारों जानें बचा सकते हैं। AI और मानव विशेषज्ञता का संयोजन भविष्य की राहत व्यवस्था का अहम हिस्सा बन सकता है।

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