पहली फिल्म से छाए अहान पांडे, लेकिन असली ‘लीजेंड’ तो उनके खून में है – भारत का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर थे दादा!
सिनेमाघरों में जब ‘सैयारा’ की स्क्रीनिंग शुरू हुई, किसी ने नहीं सोचा था कि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तूफान ला देगी। लेकिन सिर्फ तीन दिन के भीतर 100 करोड़ रुपये की कमाई करके इस छोटे बजट की फिल्म ने सारे अनुमानों को गलत साबित कर दिया। नए चेहरों के बावजूद फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है। खासतौर पर इसके लीड एक्टर अहान पांडे की एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों का दिल जीत लिया है।
अहान पांडे अब रातों-रात स्टार बन चुके हैं। सोशल मीडिया से लेकर गूगल सर्च तक, हर जगह उनके नाम की चर्चा हो रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस युवा एक्टर की जड़ें सिर्फ ग्लैमर की दुनिया में नहीं हैं – बल्कि वो एक ऐसे ‘लीजेंड’ का खून हैं, जिसने भारत के मेडिकल इतिहास में अपनी छाप छोड़ी थी।
जी हां, अहान पांडे के दादा थे डॉ. शरद पांडे – वो नाम जिन्होंने भारत में पहली बार हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी करने वाली टीम में अहम भूमिका निभाई थी। 1934 में जन्मे डॉ. शरद पांडे सिर्फ एक सर्जन नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस के एक पायनियर थे। वे देश के उन गिने-चुने डॉक्टरों में से एक थे जिन्होंने बिना खून बहाए (ब्लडलेस) ओपन हार्ट सर्जरी करने की शुरुआत की थी। उन्होंने कनाडा से मास्टर्स की डिग्री लेकर भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई दिशा दी।
मुंबई के प्रतिष्ठित KEM अस्पताल और सेठ गोर्धनदास सुंदरदास मेडिकल कॉलेज में सेकंड यूनिट चीफ के तौर पर उन्होंने कई जिंदगियों को नई सांस दी। उनका योगदान केवल तकनीकी नहीं था, बल्कि एक सोच की नींव भी था – कि भारत में भी विश्वस्तरीय चिकित्सा संभव है।
जहां एक ओर अहान के चाचा चंकी पांडे बॉलीवुड में पहले से ही स्थापित हैं और उनकी कजिन अनन्या पांडे इंडस्ट्री में अपनी जगह बना चुकी हैं, वहीं अहान ने अब ‘सैयारा’ से अपने करियर की ऐसी शुरुआत की है जिसने साबित कर दिया है कि उनके अंदर भी कुछ बड़ा कर गुजरने की क्षमता है।
पर यह साफ है – अहान का स्टारडम नया हो सकता है, लेकिन उनका ‘लीगेसी’ बहुत पुराना और बेहद प्रेरणादायक है। अभिनय उनके खून में जरूर है, पर उस खून में एक ऐसे डॉक्टर की विरासत भी है, जिसने न सिर्फ दिलों का इलाज किया, बल्कि इतिहास रच दिया।
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