अडानी ग्रुप का एविएशन सेक्टर में बड़ा दांव: 20,000 करोड़ से नवी मुंबई में बनेगा ‘एयरपोर्ट शहर’
अडानी ग्रुप ने एविएशन सेक्टर में अपनी ताकत और बढ़ाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत कंपनी ने 20,000 करोड़ रुपये के निवेश का विशाल प्लान तैयार किया है, जिसका लक्ष्य है कि भारत के प्रमुख एयरपोर्ट्स को केवल उड़ानों के केंद्र नहीं, बल्कि पूर्ण विकसित बिजनेस हब के रूप में बदला जाए। इस निवेश के जरिए कंपनी एयरपोर्ट्स के पास शहरों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी, जिससे गैर-हवाई गतिविधियों से भी कमाई को बढ़ावा मिलेगा।
Adani Airports Holdings के CEO अरुण बंसल के अनुसार, यह रणनीति कंपनी को एक स्थायी और फ्लेक्सिबल बिजनेस मॉडल प्रदान करेगी। उनके मुताबिक एयरपोर्ट को अब पारंपरिक यात्रा केंद्र नहीं, बल्कि ऐसे स्पेस में बदला जाएगा जहाँ होटल, मॉल, ऑफिस, फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं यात्रियों और स्थानीय लोगों को सालभर उपलब्ध होंगी। इससे एयरपोर्ट्स की कमाई का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा।
इस प्लान का सबसे बड़ा फोकस मुंबई और नवी मुंबई एयरपोर्ट्स पर होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल निवेश का करीब 70% हिस्सा इन दोनों लोकेशनों पर खर्च किया जाएगा। खासतौर पर नवी मुंबई एयरपोर्ट पर 240 एकड़ ज़मीन पर एक नई “एयरपोर्ट टाउनशिप” विकसित की जाएगी, जिसमें पांच लग्जरी होटल (1,000 कमरे), एक भव्य मॉल और तीन बड़े ऑफिस टावर होंगे। इस क्षेत्र में रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की अनुमति नहीं होगी और इसे पूरी तरह से व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जाएगा।
यह योजना अंतरराष्ट्रीय मॉडल जैसे शिफोल (एम्स्टर्डम), सिडनी और ज्यूरिख के ‘द सर्कल’ की तर्ज पर तैयार की गई है। अडानी एयरपोर्ट्स के सिटीसाइड डेवलपमेंट के सीईओ अमित ग्रोवर ने कहा कि इस डेवलपमेंट से एयरपोर्ट एक ऐसा जीवंत क्षेत्र बनेगा जो केवल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र होगा।
अभी अडानी एयरपोर्ट्स की कुल आय में 50% हिस्सा हवाई सेवाओं से आता है, लेकिन कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 तक यह घटकर सिर्फ 30% रह जाए। बाकी 70% रेवेन्यू रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, ऑफिस स्पेस और फूड से जुड़े बिजनेस से आएगा। इसके लिए कंपनी ने बड़े होटल ब्रांड्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है और नवी मुंबई को शुरुआती चरण में प्राथमिकता दी गई है क्योंकि वहाँ विकास के रास्ते कानूनी रूप से ज्यादा खुले हैं, जबकि मौजूदा मुंबई एयरपोर्ट पर कुछ नियामकीय बाधाएं हैं।
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