April 19, 2026

100 टन ज़िंदा मगरमच्छों की बोली! चीन में शुरू हुई अनोखी नीलामी, अदालत का चौंकाने वाला फैसला

शेनझेन, चीन – अदालत में आमतौर पर गवाहों और सबूतों की चर्चा होती है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। चीन के शेनझेन नानशान पीपुल्स कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने पूरे देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का ध्यान खींच लिया है। दरअसल, इस अदालत ने 100 टन ज़िंदा मगरमच्छों की ऑनलाइन नीलामी शुरू कर दी है—जी हां, आप सही पढ़ रहे हैं, ज़िंदा मगरमच्छ!

यह अनोखी नीलामी चीन के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अलीबाबा के ज्यूडिशियल ऑक्शन पोर्टल पर की जा रही है, जहां आमतौर पर जब्त की गई संपत्ति, कारें, मकान या कीमती वस्तुएं बोली में लगाई जाती हैं। लेकिन इस बार नीलामी की लिस्ट में शामिल है करीब 200 से 500 सियामी प्रजाति के जिंदा मगरमच्छ, जिनका कुल वजन 100 टन तक पहुंचता है।

कैसे आई नीलामी की नौबत?

इस हैरान कर देने वाली नीलामी के पीछे एक कहानी है—गुआंगडोंग प्रांत की होंग्यी क्रोकोडाइल इंडस्ट्री कंपनी की कहानी। इस कंपनी की शुरुआत 2005 में कारोबारी मो जुनरोंग ने की थी, जिन्हें कभी “क्रोकोडाइल गॉड” कहा जाता था। चीन में मगरमच्छ पालन को कानूनी मंज़ूरी 2003 में ही मिली थी, और जुनरोंग की कंपनी ने इस कारोबार में बड़ी पहचान बनाई थी। लेकिन वक्त के साथ बिजनेस डूबता गया और कंपनी पर भारी कर्ज चढ़ गया।

अब हालत ये है कि कंपनी की सारी संपत्ति जब्त की जा चुकी है, जिसमें ये विशालकाय मगरमच्छ भी शामिल हैं। अदालत ने फैसला सुनाया है कि इन मगरमच्छों को बेचकर कर्ज की भरपाई की जाएगी। नीलामी की प्रक्रिया 10 मार्च 2025 से शुरू हो चुकी है और 9 मई 2025 तक चलेगी—यानि पूरे दो महीने तक कोई भी बोली लगा सकता है।

बोली की शर्तें भी हैं भारी

लेकिन सिर्फ बोली लगाना काफी नहीं है। कोर्ट ने इस नीलामी को लेकर कई सख्त शर्तें भी लागू की हैं। सबसे पहले, बोली लगाने वाले को चीन में मगरमच्छ पालने का वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है। इसके अलावा, बोली जीतने वाले को खुद ही मगरमच्छों को पकड़ने, तोलने, ट्रांसपोर्ट करने और लदवाने का खर्च उठाना होगा।

नीलामी में भाग लेने के लिए 3 लाख युआन की जमा राशि रखी गई है। अगर कोई व्यक्ति या संस्था बोली जीतने के बाद शर्तों को पूरा नहीं कर पाती, तो यह राशि जब्त कर ली जाएगी।

मगरमच्छ: जानवर नहीं, बिजनेस मॉडल

यह पूरी घटना चीन में मगरमच्छ पालन के बढ़ते कारोबारी पहलू को भी उजागर करती है। सियामी मगरमच्छों से कीमती चमड़ा, तेल, मांस और यहां तक कि पारंपरिक दवाएं भी बनाई जाती हैं। यही वजह है कि मगरमच्छों को केवल एक जानवर नहीं बल्कि व्यापारिक संसाधन के रूप में देखा जाता है।

हर मगरमच्छ का औसत वजन करीब 200 से 500 किलो के बीच होता है। यानी 100 टन मगरमच्छों का मतलब है लगभग 200 से 500 मगरमच्छ, जो नीलामी का हिस्सा हैं।

सोशल मीडिया पर हलचल

जैसे ही ये खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर इस अनोखी नीलामी को लेकर बहस छिड़ गई। कुछ लोग इसे अजीब और खतरनाक बता रहे हैं, तो कई इसे एक शानदार बिजनेस अवसर के रूप में देख रहे हैं। कुछ ने तो मज़ाक में पूछा भी—”अगर नीलामी में जीत गए तो क्या मगरमच्छ खुद चलकर घर आएंगे?”

यह नीलामी चीन की न्यायिक प्रणाली और व्यापारिक सोच के उस पहलू को दिखाती है, जो बाकी दुनिया के लिए असामान्य हो सकता है। यह एक ऐसी खबर है जो कोर्टरूम, कारोबारी दुनिया और वन्यजीव संरक्षण—तीनों के बीच की रेखाओं को धुंधला कर देती है।

अब देखना यह है कि कौन होगा वो साहसी खरीदार जो 100 टन ज़िंदा मगरमच्छों को अपने कब्ज़े में लेगा—और क्या वह इन ‘जलजलों’ को संभाल पाएगा?

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