आगरा में दर्दनाक पैराशूट हादसा: जूनियर वारंट अफसर की जान गई, पैराशूट क्यों नहीं खुला? जांच शुरू
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाला पैराशूट हादसा हुआ, जिसमें भारतीय वायुसेना के एक जूनियर वारंट अधिकारी ने अपनी जान गंवा दी। यह हादसा उस वक्त हुआ जब अधिकारी ने सात हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई, लेकिन उनका पैराशूट नहीं खुला, जिसके कारण वह नीचे गिर गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मृतक अधिकारी का नाम जीएस मंजूनाथ था, जो मूल रूप से कर्नाटक के शिमोगा जिले के संलूरू गांव के रहने वाले थे।
मंजूनाथ पिछले कई वर्षों से आगरा में तैनात थे और एयरफोर्स स्टेशन के पैराट्रूपर्स प्रशिक्षण स्कूल (PTC) में एक प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत थे। उनकी मौत के बाद वायुसेना ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं, जबकि अधिकारी की लापरवाही और दुर्घटना के कारणों पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (GPS) से हुई खोज
हादसे के बाद, जीएस मंजूनाथ का पता लगाने के लिए ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (GPS) का सहारा लिया गया। करीब दो घंटे बाद, उनकी लोकेशन सुतेड़ी गांव के एक गेहूं के खेत में मिली। वायुसेना की टीम मौके पर पहुंची, जहां उन्होंने पाया कि मंजूनाथ के नाक से खून बह रहा था और उनके शरीर में कई चोटें आई थीं। साथ ही, पैराशूट नहीं खुलने के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
इसके बाद, उन्हें वायुसेना के सैन्य अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी उनके परिवार को दे दी गई है।
हादसे की समयसीमा
यह हादसा शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे के आसपास हुआ, जब वायुसेना स्टेशन, आगरा से एएन-32 विमान में जूनियर वारंट अफसर जीएस मंजूनाथ और 11 प्रशिक्षु पैराट्रूपर्स ने सात हजार फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई। सभी को मलपुरा ड्रॉपिंग जोन में उतरने का निर्देश था, लेकिन 10 बजे तक 11 अन्य प्रशिक्षु तो तय जगह पर पहुंच गए, लेकिन मंजूनाथ का कोई पता नहीं चला।
इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई, और फिर GPS से मंजूनाथ की ट्रैकिंग शुरू की गई। ड्रोन की मदद से भी उन्हें तलाशने का प्रयास किया गया।
जांच की प्रक्रिया
मंजूनाथ के पैराशूट न खुलने के कारणों की जांच की जा रही है। वायुसेना ने यह स्पष्ट किया है कि मंजूनाथ ने अब तक 600 से अधिक छलांगें लगाई थीं और वह एक अनुभवी पैराजंपर थे। फिर भी उनके पैराशूट का न खुलना एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। वायुसेना की टीम ने उस क्षेत्र को सील कर दिया है, जहां मंजूनाथ गिरे थे। उस जगह को पूरी तरह से सुरक्षित किया गया है और अब यह जांच का विषय है कि आखिर क्यों उनका रिजर्व पैराशूट भी नहीं खुला।
फिलहाल, इस दर्दनाक घटना ने सभी को चौंका दिया है, और पूरे वायुसेना समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। जांच के बाद ही यह पता चल पाएगा कि आखिर ऐसा क्यों हुआ, और इस प्रकार की घटनाओं से कैसे निपटा जा सकता है।
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