अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य से बनाई दूरी: सपा की सीटों की गिनती में शामिल नहीं हैं मौर्य
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मिशन 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक ओर बीजेपी के रणनीतिकार और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लखनऊ से चुनावी तैयारियों का आगाज किया, तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पुराने सहयोगी स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। गौरतलब है कि दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात और अपनी पार्टी को इंडिया गठबंधन में शामिल करने की घोषणा के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर जब अखिलेश यादव से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य उनके गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। इतना ही नहीं, अखिलेश ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि स्वामी प्रसाद मौर्य को समाजवादी पार्टी की सीटों की गिनती में भी शामिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से इस मुद्दे पर स्वामी प्रसाद मौर्य को नजरअंदाज करने की बात भी कही।
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद चर्चा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य
दरअसल, उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने अक्टूबर की शुरुआत में दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी ‘अपनी जनता पार्टी’ के इंडिया गठबंधन में शामिल होने का ऐलान किया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की सियासत में स्वामी प्रसाद मौर्य की भूमिका और गठबंधन की राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। इसी बीच अखिलेश यादव से जब स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने उनके साथ किसी भी तरह के गठबंधन से इनकार कर दिया। अखिलेश यादव के बयान से साफ है कि समाजवादी पार्टी फिलहाल स्वामी प्रसाद मौर्य को अपने राजनीतिक गठबंधन या सीटों के समीकरण का हिस्सा नहीं मान रही है।
2022 में बीजेपी छोड़कर सपा में आए थे मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच मौजूदा तल्खी के पीछे पुराना राजनीतिक घटनाक्रम भी अहम है। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामा था। उनके सपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी और विधान परिषद भेजकर एमएलसी भी बनाया। हालांकि, पार्टी के भीतर वैचारिक मतभेद बढ़ने के बाद वर्ष 2024 की शुरुआत में स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता भी छोड़ दी। सपा से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी का गठन कर लिया।
सपा छोड़ने के बाद अखिलेश यादव पर लगातार साधते रहे निशाना
समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य कई मौकों पर अखिलेश यादव और उनकी राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते रहे हैं। खासतौर पर समाजवादी पार्टी की पीडीए राजनीति को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि पीडीए में ‘डी’ का मतलब कभी दलित बताया जाता है तो कभी डिंपल यादव। स्वामी प्रसाद मौर्य ने सवाल उठाया था कि जिस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद इस मुद्दे पर स्पष्ट नहीं है, वह अपनी पार्टी और प्रदेश को क्या दिशा दे सकता है। उनके इस बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद और अधिक चर्चा में आ गए थे।
‘वैचारिक मतभेद हैं, मनभेद नहीं’, इस्तीफे के बाद मौर्य ने कही थी यह बात
सपा छोड़ने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव के साथ अपने रिश्तों को लेकर भी सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव से उनके वैचारिक मतभेद हैं, मनभेद नहीं। स्वामी प्रसाद मौर्य का आरोप था कि अखिलेश यादव समाजवादी विचारधारा से अलग दिशा में जा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्होंने अपने इस्तीफे का पत्र अखिलेश यादव के नाम भेजा था, लेकिन सपा अध्यक्ष ने उनसे बातचीत करना उचित नहीं समझा। मौर्य के इन बयानों से स्पष्ट था कि सपा से अलग होने के बाद भी दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद सार्वजनिक मंचों पर लगातार सामने आते रहे।
मौर्य के इस्तीफे पर अखिलेश ने भी दी थी प्रतिक्रिया
स्वामी प्रसाद मौर्य के समाजवादी पार्टी छोड़ने के समय अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। उस दौरान सपा प्रमुख ने कहा था कि किसी के मन में क्या चल रहा है, यह कोई नहीं जान सकता। उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि राजनीति में हर कोई अपने फायदे के लिए भाग रहा है। अब मिशन 2027 की तैयारियों के बीच अखिलेश यादव का ताजा बयान एक बार फिर दोनों नेताओं के बीच दूरी को चर्चा में ले आया है। स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से इंडिया गठबंधन में शामिल होने की घोषणा के बावजूद अखिलेश यादव ने उन्हें सपा के गठबंधन और सीटों के राजनीतिक समीकरण से अलग बताया है। ऐसे में आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की गठबंधन राजनीति में इस घटनाक्रम पर नजर रहेगी।
Share this content:
