बहुचर्चित नीला ड्रम हत्याकांड: सौरभ राजपूत की हत्या में कोर्ट का बड़ा फैसला, मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा
लखनऊ/मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में बहुचर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या करने और शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से बंद करने का आरोप था। इस सनसनीखेज वारदात ने मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था। घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था और सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक इस हत्याकांड की चर्चा हुई थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने 30 सितंबर को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया था। मामले में 17 सितंबर को अंतिम बहस पूरी हो गई थी, जिसके बाद अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे। इसके अगले दिन, 25 फरवरी को घर में मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया था, जबकि 28 फरवरी को उनकी बेटी पीहू का जन्मदिन था। इसके कुछ ही दिन बाद, 3 मार्च 2025 की रात मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में सौरभ की हत्या कर दी गई। आरोप है कि मुस्कान और साहिल ने सौरभ को नींद की दवा देने के बाद उनकी हत्या की और शव के टुकड़े करके उन्हें नीले ड्रम में भर दिया। इसके बाद ड्रम में सीमेंट भरकर उसे बंद कर दिया गया, ताकि शव को छिपाया जा सके। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए थे। जब इस मामले का खुलासा हुआ, तो हत्या के तरीके और शव को छिपाने की कोशिश ने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी।
22 गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर चला मुकदमा
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए और दोनों आरोपियों के खिलाफ 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। सौरभ के परिवार की ओर से मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विजय बहादुर के अनुसार, गवाहों में सौरभ के भाई बबलू, उनकी मां और दोस्त शामिल थे। इसके अलावा उन दुकानदारों की भी गवाही कराई गई, जिनसे वारदात से संबंधित ड्रम, दवाइयां, चाकू, सीमेंट और रेत खरीदे जाने की बात सामने आई थी। अभियोजन पक्ष ने इन साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। अदालत में सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार किया गया, जिसके बाद दोनों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई।
जेल में नशे की लत छुड़ाने में लगी थी कई महीने की मशक्कत
मेरठ जेल के अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के अनुसार, जेल में मुस्कान और साहिल को नशे की लत से बाहर निकालने में शुरुआत में काफी परेशानी हुई थी। इस प्रक्रिया में करीब तीन से चार महीने का समय लगा। जेल अधीक्षक ने बताया कि साहिल से मिलने के लिए पहले उसकी दादी आती थीं और बाद में उसका भाई भी मिलने आने लगा, लेकिन मुस्कान से मिलने के लिए अब तक उसके परिवार का कोई सदस्य जेल नहीं पहुंचा था। जेल में रहते हुए मुस्कान ने पिछले साल नवंबर में एक बेटी को जन्म दिया था। जेल अधीक्षक के मुताबिक, इसके बाद मुस्कान धार्मिक गतिविधियों की ओर झुकी और अब वह अपनी बेटी से मिलना चाहती है। इस मामले में जहां अदालत ने हत्या के आरोप में दोनों को मृत्युदंड सुनाया है, वहीं जेल में उनके व्यवहार और पारिवारिक संपर्क को लेकर भी कई बातें सामने आई हैं।
देशभर में चर्चा में रहा था नीले ड्रम वाला हत्याकांड
सौरभ राजपूत हत्याकांड का खुलासा होने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया था। नीले ड्रम में शव के टुकड़े भरकर सीमेंट से बंद करने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया था। मामले को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हुई और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठी थी। अब जिला अदालत द्वारा मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। सौरभ के परिवार को इस मुकदमे से न्याय मिलने की उम्मीद थी और अभियोजन पक्ष ने भी अदालत में अधिकतम सजा की मांग की थी। अदालत के इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
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