April 17, 2026

लखनऊ में BAPSA का ‘UGC समर्थन महाआंदोलन’, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, नियमावली 2026 लागू करने की मांग

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लखनऊ के परिवर्तन चौक पर 14 मार्च को बिरसा आंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (BAPSA) और बहुजन छात्र समुदाय की ओर से “UGC समर्थन महाआंदोलन” आयोजित किया गया। इस आंदोलन के माध्यम से छात्रों ने उच्च शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों को उठाते हुए केंद्र सरकार से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई नियमावली 2026 को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं और संगठन के प्रतिनिधियों ने भारत की राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी भेजा, जिसमें उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े कई अहम बिंदुओं को शामिल किया गया।

प्रदर्शन में शामिल छात्र नेताओं ने कहा कि देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए नई UGC नियमावली 2026 एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। उनका कहना है कि यदि इस नियमावली को देशभर के केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में सही तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे शैक्षणिक संस्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा। छात्रों ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों में लंबे समय से पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में नई नियमावली इस दिशा में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

छात्र संगठन ने अपने ज्ञापन में यह भी मांग की कि नई नियमावली लागू करते समय सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को भी मजबूती से लागू किया जाए। इसके तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, शोधवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सहायता योजनाओं को और अधिक मजबूत और समयबद्ध बनाया जाए। उनका कहना है कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त संसाधन और अवसर उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी मांग की कि सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण नीति का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही प्रवेश और भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार के भेदभाव या अनियमितता की गुंजाइश न रहे। छात्रों का कहना है कि संविधान में सामाजिक न्याय और समान अवसर की जो भावना है, उसे शिक्षा व्यवस्था में भी पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।

BAPSA और बहुजन छात्र समुदाय ने सरकार से यह भी अपील की कि शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों और सुधारों में छात्र संगठनों, शिक्षाविदों और सामाजिक न्याय के पक्षधर प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि यदि नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में छात्रों और शिक्षाविदों की सहभागिता बढ़ेगी, तो शिक्षा व्यवस्था अधिक लोकतांत्रिक, समावेशी और प्रभावी बन सकेगी। छात्रों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

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