April 17, 2026
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आज का पंचांग 13 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास की कृष्ण एकादशी तिथि है। आज सूर्यदेव कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं , जहां वे बुधदेव, शुक्रदेव और राहु के साथ होंगे। सूर्य और राहु एक साथ में बहुत अच्छे नहीं माने जाते हैं। चंद्रदेव आज धनु राशि के मूल नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं, जो व्यक्तित्व में थोड़ी गंभीरता और अनुशासन ला सकते हैं। मूल नक्षत्र में जन्मे बालकों के लिए कुछ पूजाएं आवश्यक बताई जाती हैं।

 

मंगलदेव मकर राशि में ही है और उच्च के हैं। यहां रहकर वे आपके भीतर काम करने का जोश और साहस बनाए रखेंगे। अपने महत्वपूर्ण कार्यों के सही संचालन के लिए दोपहर 12:13 से 12:58 तक के अभिजीत मुहूर्त का उपयोग करना बहुत लाभकारी रहेगा। सुबह 11:12 से दोपहर 12:35 तक राहुकाल रहेगा, इस समय धैर्य रखें और किसी भी नए काम की शुरुआत करने से बचें।

आज विजया एकादशी की सूर्योदय तिथि है इसलिए व्रत रखने वाले काफी लोग आज व्रत रखेंगे।

 

महत्वपूर्ण विवरण

तिथि: कृष्ण एकादशी – दोपहर 02:25 बजे तक

योग: वज्र – रात्रि 03:23 बजे तक (14 फरवरी)

करण: बलव – दोपहर 02:25 बजे तक

करण: कौलव – रात्रि 03:17 बजे तक (14 फरवरी)

 

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय: प्रातः 07:01 बजे

सूर्यास्त का समय: सायं 06:10 बजे

चंद्रोदय का समय: प्रातः 04:53 बजे (14 फरवरी)

चंद्रास्त का समय: दोपहर 02:10 बजे

 

समस्त नव ग्रहों की की राशियां (प्रात: 06: 00 बजे)

सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

चन्द्र देव: धनु राशि में स्थित हैं।

मंगल देव: मकर राशि में स्थित हैं।

बुध देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

गुरु बृहस्पति: मिथुन राशि में स्थित हैं।

शुक्र देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

शनि देव: मीन राशि में स्थित हैं।

राहु देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

केतु देव: सिंह राशि में स्थित हैं।

 

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 12:58 बजे तक

अमृत काल: प्रातः 09:08 बजे से प्रातः 10:54 बजे तक

 

आज के अशुभ समय

राहुकाल: प्रातः 11:12 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक

गुलिकाल: प्रातः 08:25 बजे से प्रातः 09:48 बजे तक

यमगण्ड: सायं 03:23 बजे से सायं 04:46 बजे तक

 

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव मूल नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।

मूल नक्षत्र: सायं 04:12 बजे तक

सामान्य विशेषताएं: क्रोधी, स्थिर मन, अनुशासनप्रिय, आक्रामक, गंभीर व्यक्तित्व, उदार, मिलनसार, दानशील, ईमानदार, कानून का पालन करने वाले, अहंकारी और बुद्धिमान

नक्षत्र स्वामी: केतु देव

राशि स्वामी: बृहस्पति देव

देवता: निरति (विनाश की देवी)

प्रतीक: पेड़ की जड़े

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