महिलाओं में बार-बार थकान और चिड़चिड़ापन कहीं हॉर्मोनल इम्बैलेंस का संकेत तो नहीं?
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कई महिलाएं लगातार थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। अक्सर इन लक्षणों को काम का दबाव या मानसिक तनाव मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक कई मामलों में इसकी वजह हॉर्मोनल इम्बैलेंस भी हो सकता है। हॉर्मोन हमारे शरीर में केमिकल मैसेंजर की तरह काम करते हैं और एनर्जी, नींद, मूड और मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
जब शरीर में हॉर्मोन सही मात्रा में काम करते हैं तो शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है, लेकिन जैसे ही इनमें असंतुलन आता है, शरीर संकेत देने लगता है। बार-बार थकान महसूस होना, बिना वजह चिड़चिड़ापन और भावनात्मक उतार-चढ़ाव ऐसे ही संकेत हो सकते हैं। अगर ये लक्षण रोजमर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने लगें, तो इन्हें हल्के में लेना ठीक नहीं होता।
आरएमएल अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सलोनी चड्ढा के अनुसार महिलाओं में हॉर्मोनल इम्बैलेंस की कई वजहें हो सकती हैं। बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना हॉर्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकता है। इसके अलावा गलत खानपान, जंक फूड का अधिक सेवन और जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी इसका कारण बन सकती है।
महिलाओं के जीवन में पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज जैसे चरणों के दौरान शरीर में प्राकृतिक हॉर्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। कुछ मामलों में थायरॉइड से जुड़ी समस्या, लंबे समय तक दवाइयों का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी भी हॉर्मोनल गड़बड़ी की वजह बनती है।
हॉर्मोनल इम्बैलेंस से बचाव के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना सबसे जरूरी है। नियमित नींद, संतुलित आहार, योग या एक्सरसाइज और तनाव को कम करने की आदत हॉर्मोन को संतुलित रखने में मदद करती है। अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी होता है।
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