अजित पवार के प्लेन हादसे की जांच करेगी CID, 28 जनवरी को बारामती में हुआ था विमान हादसा
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती क्षेत्र में हुए विमान हादसे में मौत के बाद अब इस पूरे मामले की जांच राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (CID) को सौंप दी गई है। हादसे के बाद पहले बारामती पुलिस थाने में आकस्मिक मृत्यु और विमान दुर्घटना का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी विस्तृत और गहन जांच CID द्वारा की जाएगी। इस संबंध में CID के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सुनील रामानंद की ओर से आधिकारिक जानकारी दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री अजित पवार 28 जनवरी की सुबह मुंबई से बारामती के लिए एक निजी विमान से रवाना हुए थे। वे जिला परिषद चुनाव प्रचार के सिलसिले में बारामती पहुंचे थे, जहां एक ही दिन में उनकी चार चुनावी सभाएं प्रस्तावित थीं। विमान ने सुबह करीब आठ बजे मुंबई से उड़ान भरी थी। बारामती हवाई अड्डे पर लैंडिंग की तैयारी के दौरान विमान अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा इतना भीषण था कि विमान में सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
इस दर्दनाक हादसे में अजित पवार के अलावा पायलट सुमित कपूर, सह-पायलट शांभवी पाठक, एयर होस्टेस पिंकी माली और अजित पवार के अंगरक्षक विदीप जाधव की भी जान चली गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और प्रारंभिक जांच के बाद मामला दर्ज किया गया। अब CID इस बात की जांच करेगी कि हादसा तकनीकी खामी के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
राज्य स्तर की जांच के साथ-साथ विमान दुर्घटना की समानांतर जांच केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा भी की जा रही है। मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाला विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) इस क्रैश की जांच में जुटा हुआ है। AAIB की दिल्ली से तीन अधिकारियों की टीम और DGCA के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय से तीन अधिकारियों की एक अन्य टीम 28 जनवरी को ही दुर्घटना स्थल पर पहुंच गई थी। जांच एजेंसियों ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं और दुर्घटनाग्रस्त विमान का ब्लैक बॉक्स भी बरामद कर लिया गया है, जिसे जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
विमान संचालक कंपनी VSR वेंचर्स की ओर से भी इस हादसे पर बयान जारी किया गया है। कंपनी ने कहा है कि पायलट सुमित कपूर को लगभग 16 हजार घंटे का उड़ान अनुभव था, जबकि को-पायलट शांभवी पाठक के पास करीब 1500 घंटे का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। कंपनी का दावा है कि उड़ान से पहले विमान की पूरी तकनीकी जांच की गई थी और उसमें किसी तरह की तकनीकी खराबी नहीं पाई गई थी। अब CID और केंद्रीय एजेंसियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह हादसा कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ।
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