April 16, 2026

महाराष्ट्र में सत्ता संतुलन पर मंथन, अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलें तेज

महाराष्ट्र की राजनीति इस समय गहरे शोक और बड़े राजनीतिक मंथन के दौर से गुजर रही है। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार के अचानक निधन के बाद राज्य सरकार में दो बेहद अहम पद रिक्त हो गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर हलचल तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री और संभवतः वित्त मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इन अटकलों को तब और बल मिला जब एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात की।

सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात केवल शोक संवेदना तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। एनसीपी के एक धड़े का मानना है कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत को बनाए रखने के लिए परिवार से ही किसी चेहरे को आगे लाना जरूरी है। ऐसे में सुनेत्रा पवार का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आ रहा है। पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता चाहते हैं कि सुनेत्रा पवार न सिर्फ सरकार में अहम भूमिका निभाएं, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी नेतृत्व संभालें।

अजित पवार के अंतिम संस्कार के बाद बारामती में समर्थकों ने खुलकर सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उठाई। समर्थकों का कहना है कि अगर सुनेत्रा पवार को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो सरकार और पार्टी दोनों में अजित पवार की राजनीतिक छवि और प्रभाव बना रहेगा। कार्यकर्ताओं का यह भी मत है कि पवार परिवार को एकजुट होकर एनसीपी के भविष्य और दोनों राष्ट्रवादी गुटों के संभावित विलय जैसे मुद्दों पर भी फैसला लेना चाहिए।

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया इससे थोड़ा अलग है। उनका कहना है कि अजित पवार राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी अध्यक्ष, राज्य में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जैसे कई अहम पदों पर रह चुके थे। ऐसे में इन सभी जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना सुनेत्रा पवार के लिए व्यावहारिक रूप से आसान नहीं होगा। विश्लेषकों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार के लिए पार्टी अध्यक्ष या उपमुख्यमंत्री जैसे किसी एक बड़े पद की जिम्मेदारी संभालना अधिक यथार्थवादी विकल्प हो सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री पद के लिए एनसीपी के अन्य वरिष्ठ नेता भी दावेदारी कर सकते हैं। छगन भुजबल समेत कई नेता लंबे समय से अजित पवार के साथ काम करते आए हैं और उनका प्रशासनिक व राजनीतिक अनुभव भी मजबूत माना जाता है। इसके अलावा पार्टी के भीतर महत्वाकांक्षाओं और सत्ता संतुलन को लेकर भी समीकरण बन रहे हैं। माना जा रहा है कि इस पूरे फैसले में भाजपा नेतृत्व की भूमिका भी अहम होगी।

उल्लेखनीय है कि अजित पवार की बुधवार को बारामती हवाई अड्डे के पास एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी। गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। अब अजित पवार के जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यह सवाल सबसे अहम बन गया है कि उनकी राजनीतिक विरासत को कौन और किस रूप में आगे बढ़ाएगा।

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