हमीरपुर में ट्रैफिक जाम बना काल,एंबुलेंस में फंसी गर्भवती महिला के गर्भ में शिशु की मौत
हमीरपुर जिले में बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग-34 पर लगे भीषण जाम के कारण एक गर्भवती महिला समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी और उसके गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ सिस्टम की खामियों को उजागर करती है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
जानकारी के अनुसार, मौदहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती गर्भवती महिला को तेज प्रसव पीड़ा होने पर डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर किया था। महिला को तुरंत एंबुलेंस के जरिए हमीरपुर जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में NH-34 पर करीब 25 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। एंबुलेंस इस जाम में बुरी तरह फंस गई और तमाम कोशिशों के बावजूद उसे रास्ता नहीं मिल सका।
जाम में लंबे समय तक फंसे रहने के दौरान गर्भवती महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजन और एंबुलेंस स्टाफ मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन ट्रैफिक नहीं खुल पाया। कीमती समय निकलता गया और जब एंबुलेंस किसी तरह जिला अस्पताल पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद गर्भ में ही शिशु की मौत की पुष्टि कर दी।
इस घटना के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश और मातम का माहौल है। उनका कहना है कि अगर समय रहते एंबुलेंस को रास्ता मिल जाता या जाम की समुचित व्यवस्था होती, तो शिशु की जान बचाई जा सकती थी। वहीं स्थानीय लोगों का भी आरोप है कि NH-34 पर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि ट्रैफिक प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल की सख्त जरूरत है। खासकर एंबुलेंस जैसी जीवनरक्षक सेवाओं के लिए अलग कॉरिडोर या त्वरित व्यवस्था न होने की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। हमीरपुर का यह दर्दनाक हादसा प्रशासन के लिए चेतावनी है कि अगर व्यवस्थाओं में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो ऐसे हादसे आगे भी दोहराए जा सकते हैं।
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