April 17, 2026

मनरेगा और SIR पर फोकस, 20 जनवरी को रायबरेली पहुंचेंगे राहुल गांधी, सांसद के तौर पर चौपाल और जनता दर्शन

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी 20 जनवरी को अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे मनरेगा और ‘SIR’ कार्यक्रम को लेकर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। सांसद के रूप में राहुल गांधी चौपाल और क्लोज डोर जनता दर्शन के माध्यम से आम लोगों से सीधे मुलाकात करेंगे और जमीनी मुद्दों पर फीडबैक लेंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा संगठनात्मक संदेश देने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 19 जनवरी को केरल दौरे से सीधे उत्तर प्रदेश के लिए रवाना होंगे और 20 जनवरी को रायबरेली पहुंचकर निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दौरे के बाद वे उसी दिन दिल्ली लौट जाएंगे। हालांकि इस यात्रा को लेकर अभी तक कांग्रेस की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पार्टी स्तर पर तैयारियां शुरू मानी जा रही हैं। लोकसभा में नेता विपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी का यह दौरा विशेष राजनीतिक महत्व रखता है।

रायबरेली में राहुल गांधी का मुख्य फोकस मनरेगा और SIR से जुड़े मुद्दों पर रहेगा। वे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह संदेश दे सकते हैं कि इन कार्यक्रमों को लेकर कांग्रेस जमीनी स्तर पर गंभीरता से काम करे। चौपाल के माध्यम से वे ग्रामीण इलाकों में मनरेगा की स्थिति, रोजगार, भुगतान और क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं को सुनेंगे, वहीं क्लोज डोर जनता दर्शन में सीमित संख्या में लोगों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी शिकायतें और सुझाव जानेंगे।

लोकसभा चुनाव 2024 के बाद यह राहुल गांधी का रायबरेली का संभावित छठा दौरा होगा। इससे पहले वे पांच बार अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। सितंबर 2025 में वे दो दिवसीय दौरे पर रायबरेली आए थे, जहां उन्होंने दिशा समिति की बैठक में भाग लेकर विकास योजनाओं की समीक्षा की थी। लगातार दौरों के जरिए राहुल गांधी अपने क्षेत्र से जुड़ाव बनाए रखने और सांसद के तौर पर सक्रिय भूमिका दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि राहुल गांधी इस यूपी दौरे के दौरान अयोध्या जा सकते हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में 20 जनवरी का यह दौरा केवल रायबरेली तक सीमित रहेगा या इसमें कोई अतिरिक्त राजनीतिक संदेश भी छिपा होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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