April 17, 2026

Magh Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि कब शुरू होगी? जानें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व माता दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित होता है और पूरे देश में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। साल में चार बार नवरात्रि पड़ती है – चैत्र, शारदीय और दो गुप्त नवरात्रियां। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से आषाढ़ और माघ माह में आती है। इस दौरान नौ दिन माता दुर्गा के नौ स्वरूपों के अलावा दस महाविद्याओं की भी पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि का आयोजन अधिकांशत: तांत्रिक और अघोरी परंपराओं के अनुसार किया जाता है, इसलिए इसकी विधि और मुहूर्त विशेष रूप से निर्धारित होते हैं।

साल 2026 में माघ गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू हो रही है। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि सोमवार की देर रात 01 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 02 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन को सनातन धर्म में विशेष महत्व की उदया तिथि माना जाता है। नवरात्रि की शुरुआत के साथ घटस्थापना की प्रक्रिया भी शुरू होती है। साधक इस दिन कलश स्थापना और पूजा के माध्यम से मां दुर्गा के आशीर्वाद की प्राप्ति करते हैं।

गुप्त नवरात्रि की घटस्थापना का शुभ मुहूर्त वैदिक गणना के अनुसार सुबह 07 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक है। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। साधक अपनी सुविधा अनुसार इस समय पर कलश स्थापना कर पूजा की शुरुआत कर सकते हैं। घटस्थापना के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति को स्थापित किया जाता है, उन्हें लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी चढ़ाई जाती है।

पूजा विधि में मां के चरणों में आवश्यक सामग्री अर्पित की जाती है और उन्हें लाल पुष्प चढ़ाए जाते हैं। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है और ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप किया जाता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक आधी रात में विशेष ध्यान और ध्यान साधना के माध्यम से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह पर्व भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति का स्रोत माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि का महत्व केवल नौ दिन की पूजा तक सीमित नहीं है। यह पर्व व्यक्ति को आत्मसाक्षात्कार, शक्ति और भौतिक एवं आध्यात्मिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता प्रदान करता है। माघ गुप्त नवरात्रि के दौरान अनुशासित तरीके से पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि यह पर्व छोटे समुदायों और साधकों के बीच गहरी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

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