May 1, 2026

 दिल्ली: राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड ने 25 साल के वरिष्ठ घोड़े ‘विराट’ को गोद लिया, गणतंत्र दिवस परेड का रहा है दिग्गज चेहरा

13 बार रिपब्लिक डे परेड में शामिल हो चुके विराट को अब मिलेगा नया घर; कमांडेंट कर्नल अमित बेरवाल ने बताया– फिटनेस और सेवाओं के कारण विराट है बेहद खास

भारतीय सेना के सबसे अनुभवी और उम्रदराज घोड़ों में शामिल ‘विराट’ को आखिरकार नया घर मिल गया है। बुधवार को राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड (PBG) ने इस 25 वर्षीय घोड़े को औपचारिक रूप से गोद ले लिया। सेना के इस वरिष्ठ घोड़े ने पूरे करियर में 13 गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया है और अपनी अनुशासित चाल व प्रभावशाली उपस्थिति के लिए अलग पहचान बनाई है। सैन्य सेवाओं में असाधारण योगदान के लिए उसे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

विराट को साल 2022 में 73वें गणतंत्र दिवस समारोह के बाद रिटायर किया गया था। PBG के कमांडेंट कर्नल अमित बेरवाल के अनुसार, लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद विराट अभी भी बेहद फिट है और युवा घोड़ों के साथ समकक्ष प्रदर्शन कर सकता है। उन्होंने बताया कि सेना के घोड़े आम घोड़ों से काफी अलग होते हैं—वे ज्यादा ऊंचे, मजबूत और लगभग 150–200 किलो अधिक भारी होते हैं, जिससे वे सैन्य परेड व औपचारिक दायित्वों के लिए उपयुक्त साबित होते हैं।

विराट को गोद लिया जाना भारतीय सेना की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसमें उन पशुओं को सम्मान दिया जाता है जिन्होंने वर्षों तक देश की सैन्य परंपराओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कर्नल बेरवाल ने बताया कि राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड की भूमिका दोहरी होती है—युद्ध के समय पैराशूट फॉर्मेशन में ऑपरेशन करना और शांति के दौर में राष्ट्रपति की सुरक्षा व औपचारिक कर्तव्यों को निभाना। इसी विशेष जिम्मेदारी के कारण रेजीमेंट अपने घोड़ों को उच्चतम मानकों पर तैयार करती है।

वर्तमान में PBG 26 जनवरी की परेड, बीटिंग द रिट्रीट और संसद के उद्घाटन समारोह की तैयारियों में जुटा है। इसके लिए घोड़ों की पहचान की जा रही है और उनकी फिटनेस, चाल, स्वभाव और अनुशासन के आधार पर चयन किया जाता है। कर्नल बेरवाल ने बताया कि दिसंबर के मध्य से लगभग 40–45 दिन तक लगातार रिहर्सल और प्रशिक्षण चलता है, जिसमें इन घोड़ों को विशेष अभ्यास कराया जाता है ताकि वे राष्ट्रीय समारोहों में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें।

विराट की गोद लेने की इस पहल को सेना के पशु सेवा मॉडल और सैन्य परंपराओं में पशुओं की अहम भूमिका का सम्मान माना जा रहा है। यह कदम न केवल सेना की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि सैन्य सेवाओं में योगदान देने वाले पशुओं को जीवन के बाद के चरणों में भी सम्मान, देखभाल और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाता है।

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