मुंबई: सिप्ला ने एली लिली एंड कंपनी के साथ की बड़ी डील, अब बेचेगी वजन घटाने और डायबिटीज की दवा
देश की प्रमुख दवा निर्माता कंपनी सिप्ला अब भारत में वजन घटाने और टाइप-2 डायबिटीज की दवा बेचने जा रही है। इसके लिए सिप्ला ने अमेरिकी फार्मा कंपनी एली लिली एंड कंपनी (इंडिया) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। यह समझौता भारत में तेजी से बढ़ रहे मोटापा और मधुमेह के मामलों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं और वजन बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
समझौते के तहत सिप्ला और एली लिली ने मिलकर टिरजेपाटाइड नामक दवा के नए ब्रांड ‘युरपीक’ (Eurpeak) के प्रचार और वितरण का करार किया है। यह वही दवा है जिसे लिली ने मार्च 2025 में भारत में ‘मौनजारो’ (Mounjaro) नाम से लॉन्च किया था। अब सिप्ला इस दवा को अपने नेटवर्क के जरिए देशभर में उपलब्ध कराएगी। दोनों कंपनियों का कहना है कि इस डील का मकसद टिरजेपाटाइड को छोटे शहरों और उन इलाकों तक पहुंचाना है, जहां लिली की पहले से मौजूदगी सीमित है।
कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि लिली, सिप्ला को युरपीक की आपूर्ति करेगी और इसकी कीमत मौनजारो के समान ही रखी जाएगी। लिली इंडिया के अध्यक्ष विन्सलो टकर ने कहा कि भारत में टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे की बढ़ती समस्या को देखते हुए यह साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, इस डील से अधिक से अधिक मरीज इस दवा तक पहुंच सकेंगे, जो न केवल ब्लड शुगर कंट्रोल करती है बल्कि वजन घटाने में भी कारगर साबित हो रही है।
हालांकि, इस बड़ी डील की घोषणा के बावजूद सिप्ला के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को बीएसई पर कंपनी का शेयर 3.35 फीसदी की गिरावट के साथ 1,590 रुपये पर आ गया। शेयर 1,639.95 रुपये पर खुला था और सुबह 10:15 बजे यह 1,598 रुपये पर कारोबार कर रहा था। निवेशकों का मानना है कि नई डील के शुरुआती निवेश और दवा वितरण नेटवर्क के विस्तार के चलते अल्पकालिक दबाव देखने को मिल सकता है, हालांकि लंबी अवधि में यह सौदा सिप्ला के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में मोटापा और डायबिटीज दोनों तेजी से बढ़ते जीवनशैली रोग हैं। सिप्ला और लिली की यह साझेदारी भारतीय दवा बाजार में हेल्थ इनोवेशन की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि युरपीक भारतीय मरीजों के लिए कितनी प्रभावी और सुलभ साबित होती है।
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