May 7, 2026

Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी पर जरूर करें ये खास काम, संतान के जीवन में बरसेगी खुशहाली और सुख-समृद्धि

अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है और यह व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन माताएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा कर तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करती हैं। यह व्रत करवा चौथ की तरह ही कठिन और पुण्यदायी माना जाता है।

पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर की रात 12:24 बजे से शुरू होकर 14 अक्टूबर की सुबह 11:09 बजे तक रहेगी। ऐसे में व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त 13 अक्टूबर की शाम 5:33 से 6:47 बजे तक रहेगा। इस समय में अहोई माता और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी के दिन शिव-पार्वती की आराधना के साथ शिव चालीसा का पाठ करने से संतान के जीवन में खुशहाली आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से शिव चालीसा का पाठ करने से संतान के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

अहोई अष्टमी व्रत के पीछे एक प्रसिद्ध कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार एक महिला ने अनजाने में साही के बच्चे को मार दिया था, जिसके कारण उसका पुत्र भी असमय मृत्यु को प्राप्त हुआ। तब माता पार्वती ने उस महिला को अहोई माता की पूजा का विधान बताया। महिला ने पूरे विधि-विधान से पूजा की और उसकी संतान पुनः जीवित हो गई। तभी से यह व्रत संतान की रक्षा और लंबी आयु के लिए किया जाने लगा।

इस दिन महिलाएं दीवार पर अहोई माता की आकृति बनाती हैं और सुई, धागे, गेहूं के दाने, जल और दीपक से पूजन करती हैं। संतान के नाम से संकल्प लेकर व्रत किया जाता है और रात्रि में तारे देखकर अर्घ्य अर्पित किया जाता है। ऐसा करने से माना जाता है कि माता अहोई अपने भक्तों की संतान पर सदैव कृपा बनाए रखती हैं।

मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत सच्चे मन और आस्था से करने पर संतान से जुड़ी हर परेशानी दूर होती है। इस दिन व्रत के साथ दान-पुण्य, भजन-कीर्तन और भगवान शिव-पार्वती की आराधना करने से घर में समृद्धि आती है और परिवार में सदा सुख-शांति बनी रहती है।

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