May 1, 2026

स्क्रीनशॉट स्कैम और फिशिंग: डिजिटल पेमेंट्स में बढ़ रहे फ्रॉड से बचने के उपाय

जैसे-जैसे डिजिटल भुगतान का दौर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर फ्रॉड की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। हाल ही में आरबीआई ने पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने के लिए एआई बेस्ड सिस्टम लॉन्च किया है, जिससे यूजर्स स्मार्टवॉच या कार से भी पेमेंट कर सकते हैं। हालांकि, इससे ऑनलाइन ठगी के नए तरीके भी सामने आए हैं। फेक स्क्रीनशॉट, फिशिंग और क्यूआर कोड फ्रॉड जैसी घटनाओं में लोग आसानी से अपना पैसा खो बैठते हैं।

रुपयापैसा.कॉम के फाउंडर मुकेश पाण्डेय और इंडिया फ्यूचर फाउंडेशन के कनिष्क गौड़ के मुताबिक, सबसे पहले किसी अननोन नंबर से आए कॉल या लिंक पर क्लिक न करना चाहिए। किसी को भी अपने कार्ड का CVV, पिन नंबर या OTP साझा नहीं करना चाहिए। मल्टीफैक्ट ऑथेंटिकेशन ऑन रखना चाहिए और फोन किसी अजनबी के हाथ में देने से बचना चाहिए। ब्लूटूथ और वाई-फाई को सार्वजनिक जगहों पर बंद रखना जरूरी है क्योंकि साइबर फ्रॉडर्स इन माध्यमों से जानकारी चोरी कर सकते हैं।

फेक स्क्रीनशॉट से होने वाले फ्रॉड में धोखेबाज पहले छोटे-छोटे ट्रांसफर करके यूपीआई आईडी ले लेते हैं और फिर आपको बड़ी ट्रांजैक्शन दिखाकर भुगतान करने के लिए मजबूर करते हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आपके अकाउंट में पैसा आया न हो और स्क्रीनशॉट दिखाया गया हो, तो कभी भी पेमेंट नहीं करनी चाहिए। यूपीआई में ट्रांसफर इमीडिएट होता है, इसलिए होल्ड या अटकी हुई ट्रांजैक्शन के आधार पर कोई भुगतान करना जोखिम भरा है।

क्यूआर कोड फ्रॉड भी आम हो गया है। कई बार दुकानों के बाहर क्यूआर कोड बदल दिए जाते हैं या उनके नंबर बदल दिए जाते हैं। इसके कारण आप गलती से धोखेबाज के अकाउंट में पेमेंट कर देते हैं। एक्सपर्ट का सुझाव है कि किसी भी क्यूआर कोड पर पेमेंट करने से पहले उसे फिजिकली चेक और वेरीफाई करें कि यह असली है और नंबर सही है।

डिजिटल भुगतान में सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय है। किसी भी अनजान लिंक, कॉल या स्क्रीनशॉट पर भरोसा करने से बचें, अपने बैंक डिटेल्स सुरक्षित रखें और हमेशा मल्टीफैक्ट ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें। इन सावधानियों से आप ऑनलाइन फ्रॉड से बच सकते हैं और अपने पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

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