May 1, 2026

12 घंटे बाद बहाल हुआ अखिलेश यादव का फेसबुक पेज, सपा ने केंद्र सरकार पर लगाया ‘लोकतंत्र पर हमला’ का आरोप

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का आधिकारिक फेसबुक पेज शुक्रवार को अचानक सस्पेंड कर दिया गया था। 80 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले इस पेज को 12 घंटे बाद मेटा ने बहाल कर दिया, लेकिन इस बीच सपा नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए।


समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का आधिकारिक फेसबुक पेज 12 घंटे से अधिक समय तक सस्पेंड रहने के बाद आखिरकार बहाल कर दिया गया है। शुक्रवार, 10 अक्टूबर की शाम को पेज अचानक बंद कर दिया गया था, जिससे सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नाराजगी फैल गई। अखिलेश यादव के इस फेसबुक पेज पर करीब 80 लाख फॉलोअर्स हैं और यह पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है।

पेज सस्पेंड होने के तुरंत बाद सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर सोशल मीडिया के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जमकर निशाना साधा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर #RestoreAkhileshPage ट्रेंड करने लगा। हजारों यूजर्स ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया। पार्टी नेताओं का कहना था कि यह कदम राजनीतिक कारणों से उठाया गया है और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने इस कार्रवाई को “लोकतंत्र पर सीधा हमला” बताया। उन्होंने कहा, “देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता का फेसबुक पेज बिना किसी कारण सस्पेंड करना केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। बीजेपी ने देश में अघोषित आपातकाल लगा रखा है, जहां विरोधियों की आवाज को हर मंच पर दबाने की कोशिश हो रही है।” उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पेज नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आवाज को रोकने की कोशिश है।

हालांकि, शनिवार सुबह करीब 12 घंटे बाद मेटा ने अखिलेश यादव का फेसबुक पेज फिर से एक्टिव कर दिया। कंपनी की ओर से इस सस्पेंशन का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया, लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला दिया गया। मेटा ने कहा कि कुछ पेजों पर अस्थायी प्रतिबंध की कार्रवाई की गई थी, जिन्हें बाद में बहाल कर दिया गया।

इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर राजनीतिक सेंसरशिप और निष्पक्षता को लेकर बहस छेड़ दी है। विपक्ष का कहना है कि सत्ता पक्ष अपने विरोधियों की डिजिटल मौजूदगी से डरता है, जबकि समर्थकों का कहना है कि प्लेटफॉर्म अपनी नीतियों के तहत ही काम करते हैं।
अखिलेश यादव का पेज बहाल होने के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने राहत की सांस ली, लेकिन यह विवाद अब सोशल मीडिया पर राजनीतिक हस्तक्षेप के नए सवाल खड़े कर गया है।

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