ट्रंप के 100 फीसदी टैरिफ बम से डूबा भारत का फार्मा सेक्टर, 74 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रांडेड और पेटेंटेड फार्मा प्रोडक्ट पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जो 1 अक्टूबर 2025 से लागू होगा. इस फैसले ने भारत के फार्मा सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है और शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है. बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स की वैल्यूएशन में कारोबार के दौरान 74 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है.
फार्मा इंडेक्स शुक्रवार को 2 फीसदी से ज्यादा टूट गया और देश की कुल 119 फार्मा कंपनियों में से 112 कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली. सन फार्मा सबसे अधिक प्रभावित हुई, जिसकी मार्केट कैप में लगभग 19 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. इसके अलावा डिविस लैब, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला, जायडस लाइफसाइंसेज, ग्लैंड फार्मा समेत कई प्रमुख कंपनियों के शेयर भी भारी दबाव में आए.
ट्रंप ने यह घोषणा ट्रुथ सोशल पर की थी कि अगर कोई कंपनी अमेरिका में अपने प्लांट चलाती है या लगाएगी तो उस पर टैरिफ लागू नहीं होगा. हालांकि अभी तक व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि टैरिफ किस तरह से लागू होंगे. इस फैसले से भारत से अमेरिका जाने वाले ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं के एक्सपोर्ट पर सीधा असर पड़ेगा, जबकि जेनेरिक दवाइयां इससे अछूती रहेंगी.
भारत के फार्मा एक्सपोर्ट में अमेरिका का योगदान काफी अहम है. वित्त वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका को फार्मा एक्सपोर्ट 10.5 अरब डॉलर रहा, जो कुल एक्सपोर्ट का 34.5 फीसदी है. सालाना फार्मा एक्सपोर्ट 30 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और मार्च 2025 में एक्सपोर्ट में 31 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई थी. ऐसे में अमेरिकी टैरिफ का असर सीधे कंपनियों की आमदनी और शेयर बाजार की स्थिति पर दिखाई देगा.
निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 2.42 फीसदी की गिरावट आई और यह 21,445.50 के स्तर पर पहुंच गया. बीएसई हेल्थकेयर 2.51 फीसदी की गिरावट के साथ 42,882.11 पर बंद हुआ. सन फार्मा, ग्लैंड फार्मा, बायोकॉन, डिविस, सिप्ला जैसी कंपनियों के शेयरों में 3-5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इससे मार्केट कैप पर भारी असर पड़ा और फार्मा सेक्टर के कुल नुकसान का आंकड़ा 74,189.78 करोड़ रुपए तक पहुंच गया.
भारत के फार्मा सेक्टर के लिए यह टैरिफ बम चुनौतीपूर्ण है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो अपने कुल रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से हासिल करती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अब कंपनियों को वैकल्पिक बाजारों और उत्पादन रणनीतियों पर ध्यान देना होगा, ताकि अमेरिकी टैरिफ के असर को कम किया जा सके.
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