GST रेट कट के बाद पेट्रोल और शराब की कीमतों पर असर: जानिए पूरी रिपोर्ट
22 सितंबर से भारत में जीएसटी रेट में बड़े बदलाव लागू किए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में 4 टैक्स स्लैब को घटाकर 2 कर दिया गया। इसके बाद देश के 375 प्रोडक्ट्स पर टैक्स कम हुआ है, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या पेट्रोल, डीजल और शराब की कीमतों में भी कटौती देखने को मिलेगी।
पेट्रोल और डीजल वर्तमान में जीएसटी के दायरे में नहीं आते हैं। इनके दाम केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए अलग-अलग टैक्स पर निर्भर करते हैं। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल करने पर विचार किया, लेकिन राज्यों ने इससे आपत्ति जताई। इसलिए, फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आएगा। इनके दाम राज्य दरों, डीलर कमीशन और माल ढुलाई लागत के आधार पर तय होते हैं, इसलिए हर राज्य में कीमतें अलग-अलग हैं।
शराब की कीमतों पर भी जीएसटी रेट कट का असर नहीं पड़ेगा। शराब पर वैट और एक्साइज ड्यूटी लगाने का अधिकार राज्यों के पास है। राज्यों का यह रेवेन्यू का बड़ा स्रोत है, इसलिए इसे जीएसटी में शामिल नहीं किया गया। राज्यों द्वारा वैट में कोई कटौती होने पर ही शराब सस्ती हो सकती है। उदाहरण के तौर पर गोवा में एक्साइज ड्यूटी 55% है, जबकि कर्नाटक में यह 80% तक है।
सरकार ने उद्योगों को निर्देश दिया है कि टैक्स कटौती का फायदा उपभोक्ताओं तक तुरंत पहुंचे। कंपनियों को पुराने स्टॉक पर रिवाइज्ड प्राइस स्टिकर लगाने और रिटेलर्स को नई कीमतों से अपडेट करने के लिए कहा गया है। इसके तहत बीमा, सीमेंट, टायर, एफएमसीजी और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने सार्वजनिक रूप से प्राइस कट का वादा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बाजार में मांग बढ़ाने और उपभोक्ता विश्वास मजबूत करने में मदद करेगा। वित्त मंत्री ने भी स्पष्ट किया कि टैक्स कटौती का उद्देश्य आम जनता को राहत देना है। पैकेज्ड फूड, पर्सनल हेल्थ, इंश्योरेंस, ऑटोमोबाइल, होटल, किचन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में इसका असर दिखने की उम्मीद है। हालांकि, पेट्रोल, डीजल और शराब फिलहाल इस रेट कट से प्रभावित नहीं होंगे।
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