Jolly LLB 3: न अक्षय, न ही अरशद… ये निकला ‘जॉली एलएलबी 3’ का असली खिलाड़ी
‘जॉली एलएलबी 3’ आखिरकार बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है और पहले ही दो दिनों में धमाकेदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने भारत में महज 48 घंटों में 32 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। शनिवार को ही फिल्म ने 20 करोड़ रुपये की कमाई की, जिससे साफ है कि वीकेंड पर यह आंकड़ा और ऊंचा जाएगा। दर्शकों ने अक्षय कुमार और अरशद वारसी की जोड़ी को खूब सराहा है, लेकिन फिल्म में एक तीसरा खिलाड़ी ऐसा निकला, जिसने अपने अभिनय से पूरी बाजी पलट दी।
इस कोर्टरूम ड्रामा का निर्देशन सुभाष कपूर ने किया है और उन्होंने कहानी को संतुलित अंदाज में पेश किया है। हास्य और गंभीर मुद्दों के बीच सही संतुलन बनाना आसान काम नहीं था, लेकिन उन्होंने यह बखूबी निभाया। फिल्म में दोनों जॉली यानी अक्षय और अरशद अपनी-अपनी जगह बेहतरीन लगे, लेकिन सबसे ज्यादा छाप सौरभ शुक्ला ने छोड़ी। जज के किरदार में उनकी मौजूदगी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन गई।
सौरभ शुक्ला की कॉमेडी टाइमिंग गजब की रही। कोर्टरूम में उनके डायलॉग्स हों या बाहर के हल्के-फुल्के सीन, हर जगह उन्होंने दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर दिया। उनकी मेडिकल रिपोर्ट वाला सीन, जिसमें वह दोनों जॉली को चौंकाते हैं, थिएटर में खूब तालियां बटोरता है। वहीं, उनका लव एंगल फिल्म में एक नया ट्विस्ट लाता है। एक पुलिस अफसर के साथ उनका नटखट अंदाज और कोर्टरूम में गुलाब पेश करने वाला सीन फिल्म को और यादगार बना देता है।
फिल्म में उनकी एंट्री भी किसी हीरो से कम नहीं रही। जॉगिंग करते हुए उनका पहला सीन थिएटर में तालियों और सीटियों से गूंज उठा। इसके बाद कोर्टरूम में दोनों जॉली के बीच उनकी प्रतिक्रियाएं दर्शकों को खूब भाईं। खास बात यह रही कि उन्होंने अपने किरदार को सिर्फ कॉमिक टोन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे कई शेड्स दिए। कभी वह सख्त जज दिखे, तो कभी संवेदनशील इंसान। यहां तक कि जब उन्होंने एक फैसले को टालकर जॉली को और वक्त दिया, उस सीन ने उनके अभिनय में गंभीरता और गहराई दोनों जोड़ी।
‘जॉली एलएलबी 3’ में सौरभ शुक्ला ने साबित कर दिया कि साइड किरदार भी फिल्म की जान बन सकते हैं। उनकी बहुआयामी परफॉर्मेंस – कॉमेडी, इमोशन, लव एंगल और जज का संतुलित रूप – ने फिल्म को एक नई ऊंचाई दी है। भले ही पोस्टर पर नाम अक्षय और अरशद का है, लेकिन पर्दे पर शो पूरी तरह सौरभ शुक्ला ने चुरा लिया। यही वजह है कि दर्शक फिल्म से निकलते वक्त सिर्फ दो जॉली नहीं, बल्कि उस असली खिलाड़ी को भी याद कर रहे हैं, जिसने हर सीन को यादगार बना दिया।
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