भारत-यूएई स्पेस और सी डील, सऊदी-पाक डिफेंस पैक्ट के बीच नई रणनीतिक हलचल
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए डिफेंस पैक्ट ने एशिया और मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल मचा दी है। इसी बीच भारत ने भी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ अंतरिक्ष और समुद्री क्षेत्र में बड़ा समझौता करने की तैयारी की है। गुरुवार को भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूएई के विदेश मंत्री के बीच इस विषय पर अहम बैठक हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान और सऊदी अरब की डील को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज है।
पाकिस्तान और सऊदी के बीच हुए डिफेंस समझौते के तहत यह तय हुआ है कि अगर दोनों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। इस डील से सऊदी अरब को पाकिस्तान की परमाणु ताकत का कवच मिल गया है। इसके बदले में सऊदी अरब पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर निवेश करने जा रहा है। रेलवे, स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की योजनाओं को लेकर फिलहाल बातचीत जारी है। इस कदम ने भारत की रणनीति पर भी असर डाला है क्योंकि पाकिस्तान और भारत के बीच पहले से ही लंबे समय से तनावपूर्ण रिश्ते हैं।
ऐसे हालात में भारत ने यूएई के साथ संबंध और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दोनों देशों के बीच पहले से ही ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग चल रहा है। अब अंतरिक्ष और समुद्री क्षेत्र में निवेश से यह साझेदारी और गहरी होगी। यूएई मिडिल ईस्ट का वह देश है, जो अंतरिक्ष मिशन में काफी आगे है और 100 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। यहां तक कि मंगल मिशन पर भी यूएई ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
समुद्री क्षेत्र में भी यूएई की पकड़ मजबूत है। दुबई का जबल अली पोर्ट अरब का सबसे बड़ा पोर्ट है और पर्शियन खाड़ी के जरिए व्यापारिक गतिविधियों में यूएई की अहम भूमिका है। भारत के साथ साझेदारी से यह पोर्ट भारत को भी सीधा लाभ पहुंचा सकता है। इस डील से भारत को न केवल ऊर्जा और टेक्नोलॉजी में बल्कि अंतरिक्ष और समुद्री व्यापार में भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी-पाक समझौते ने भारत की रणनीति को नए सिरे से आकार दिया है। पाकिस्तान की ओर से किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए भारत अब यूएई जैसे अहम सहयोगी देशों के साथ गहराई से जुड़ने की तैयारी कर रहा है। आने वाले समय में यह डील भारत-यूएई के रिश्तों को नई दिशा देने के साथ-साथ पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति और आर्थिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है।
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