लखनऊ: पूर्व पुलिस अधिकारी समेत 8 पर केस, मड़ियांव थाने से गायब हुई केस डायरी, मचा हड़कंप
लखनऊ में पुलिस की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। मड़ियांव थाने से एक बेहद अहम केस की डायरी रहस्यमय तरीके से गायब हो गई है। यह वही केस है जिसमें तत्कालीन सीओ अलीगंज हबीबुल हसन समेत आठ अन्य पुलिसकर्मियों पर डकैती, हत्या की कोशिश और एससी-एसटी एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। केस डायरी के अचानक गायब हो जाने से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, मड़ियांव के सुलतानपुर इलाके की रहने वाली बिट्टा देवी ने 16 जून 2006 को शिकायत दर्ज करवाई थी। इसमें तत्कालीन सीओ हबीबुल हसन, इंस्पेक्टर एसपी सिंह, एसआई डीएन सिंह, यूजभूषण दूबे, सुरेश कुमार सिंह समेत कई पुलिसकर्मियों पर दबिश के दौरान डकैती करने और विरोध करने पर जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया गया था। यही नहीं, रिपोर्ट में एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई थीं।
पुलिस ने इस मामले की जांच कर 30 जून 2015 को फाइनल रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट और केस डायरी को 12 जुलाई 2018 को डाक रनर हेड कॉन्स्टेबल सूर्यभान ने मड़ियांव थाने को सौंपा था। सूर्यभान ने यह दस्तावेज तत्कालीन हेड कॉन्स्टेबल राजेंद्र सिंह को दिए थे, जो उस समय थाने पर डाक का काम देखते थे। इसके बाद केस डायरी और फाइनल रिपोर्ट का कोई पता नहीं चला।
गंभीर लापरवाही सामने आने पर मड़ियांव इंस्पेक्टर ने शुक्रवार को दो पूर्व पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई है। इनमें से एक प्रदीप मिश्रा का निधन हो चुका है जबकि दूसरा आरोपी राजेंद्र कुमार अब रिटायर हो चुका है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने अहम दस्तावेज थाने से कैसे और क्यों गायब हुए?
इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह केस वर्षों से दबाया जा रहा था और केस डायरी गायब होना इसमें एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।
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