April 29, 2026

कौन बनेगा 125 लाख करोड़ रुपए का वारिस? अंबानी से अडानी तक बदल रही है अगली पीढ़ी की तस्वीर

भारत के कॉर्पोरेट जगत में इस समय एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। देश की शीर्ष बिज़नेस फैमिलीज़ अपनी विरासत अगली पीढ़ी को सौंप रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक 2024 से 2030 के बीच करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 125 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति का हस्तांतरण होने वाला है। यह बदलाव केवल संपत्ति के स्वामित्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नई पीढ़ी को बड़े पैमाने पर जिम्मेदारी और नेतृत्व भी संभालना होगा।


अडानी ग्रुप: चार वारिस, चार जिम्मेदारियां

गौतम अडानी पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे 70 साल की उम्र में रिटायर हो जाएंगे। उनके साम्राज्य की कमान अगली पीढ़ी संभालेगी। बेटे करण अडानी बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स, भतीजे प्रणव अडानी खाद्य तेल, ऑयल और रियल एस्टेट, सागर अडानी ग्रीन एनर्जी, जबकि जीत अडानी एयरपोर्ट और डिजिटल बिज़नेस देख रहे हैं। खास बात यह है कि परिवार की महिलाएं भी अहम रोल निभा रही हैं। सागर की पत्नी सृष्टि और जीत की पत्नी दिवा को भी रणनीतिक जिम्मेदारियां दी गई हैं।


अंबानी साम्राज्य का बंटवारा

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने 2023 में उत्तराधिकार का खाका साफ कर दिया। उन्होंने अपने तीनों बच्चों को बोर्ड में शामिल कर जिम्मेदारी सौंपी। ईशा अंबानी रिटेल, आकाश अंबानी जियो (टेलीकॉम) और अनंत अंबानी ग्रीन एनर्जी के नेतृत्व में हैं। यानी रिलायंस साम्राज्य को तीन हिस्सों में बांटकर अगली पीढ़ी को स्वतंत्र जिम्मेदारी दी गई है।


गोदरेज और मिस्त्री परिवार में बदलाव

127 साल पुराने गोदरेज ग्रुप ने भी 2024 में आपसी सहमति से बंटवारा किया। आदि और नादिर गोदरेज ने इंडस्ट्री और प्रोडक्ट बिज़नेस की कमान संभाली, जबकि जमशेद और स्मिता ने रियल एस्टेट और गोदरेज एंड बॉयस का नेतृत्व किया। अब अगली पीढ़ी यानी पिरोजशा गोदरेज और न्यारिका (जमशेद की बेटी) कंपनी को आगे ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

इसी तरह शापूरजी पलोनजी ग्रुप ने भी उत्तराधिकार प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया। शापूर मिस्त्री ने अपने बेटे पलोन और दिवंगत साइरस मिस्त्री के बेटों फिरोज और ज़हान को ग्रुप में शामिल कर लिया है। अब यह नई पीढ़ी कंपनी के भविष्य की रणनीति और गवर्नेंस में सक्रिय है।


आईटी और अन्य क्षेत्रों में उत्तराधिकार

एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ के संस्थापक शिव नादर ने अपनी जिम्मेदारी बेटी रोशनी नादर को सौंप दी है। रोशनी अब कंपनी की चेयरपर्सन हैं और सबसे बड़ी शेयरहोल्डर भी। वहीं दूसरी ओर, केके मोदी ग्रुप में उत्तराधिकार की प्रक्रिया सुचारू नहीं रही। 2019 में केके मोदी के निधन के बाद बीना मोदी और उनके बेटों समीर व ललित मोदी के बीच कानूनी लड़ाई छिड़ गई। हाल ही में बीना मोदी को फिर से कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर चुना गया, लेकिन पारिवारिक विवाद अब भी जारी है।


आगे का संकेत

कॉर्पोरेट घरानों में यह बदलाव केवल चेहरों का नहीं है, बल्कि रणनीति का भी है। नई पीढ़ी के हाथों में टेक्नोलॉजी, हरित ऊर्जा, डिजिटल बिज़नेस और वैश्विक विस्तार की बड़ी जिम्मेदारी होगी। ऐसे में भारत की अगली आर्थिक छलांग काफी हद तक इन्हीं वारिसों की सोच और निर्णय पर निर्भर करेगी।

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