आगरा: शुगर और हार्ट के मरीजों को खिला दी गईं नकली दवाएं, 12 राज्यों तक फैला सप्लाई नेटवर्क
उत्तर प्रदेश के आगरा में नकली दवाओं का बड़ा खुलासा हुआ है जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते 22 अगस्त को औषधि विभाग और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने शहर की दो प्रमुख मेडिकल एजेंसियों—हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल एजेंसी—पर छापेमारी की थी। इस दौरान शुगर और हार्ट के मरीजों को दी जाने वाली बड़ी मात्रा में दवाएं जब्त की गईं। इन दवाओं के सैंपल कंपनियों को जांच के लिए भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट अब सामने आई है। सन फार्मा और सनोफी इंडिया ने साफ कर दिया है कि रोसुवास और एमारिल नाम की दवाएं उनके द्वारा बनाई ही नहीं गई थीं, यानी ये पूरी तरह नकली थीं।
जांच रिपोर्ट ने यह भी उजागर किया कि इन नकली दवाओं की सप्लाई केवल आगरा तक सीमित नहीं थी, बल्कि 12 राज्यों में की जा रही थी। आशंका है कि ये दवाएं पुडुचेरी की अवैध फैक्ट्रियों—मीनाक्षी फार्मा और श्री अमान फार्मा—में तैयार की गईं और ट्रेन के जरिए आगरा पहुंचाई गईं। इसके बाद स्थानीय एजेंसियों के जरिये इन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता था। इस काले कारोबार का असर उन हजारों मरीजों पर पड़ा है जो इन दवाओं पर भरोसा कर रहे थे।
छापेमारी के दौरान हे मां मेडिको से रोसुवास टैबलेट और बंसल मेडिकल एजेंसी से एमारिल टैबलेट समेत कई सैंपल जब्त किए गए। अधिकारियों ने बताया कि इन दवाओं के पैकेट पर फर्जी बैच नंबर और निर्माण तिथि दर्ज की गई थी। यहां तक कि एलेग्रा 120 टैबलेट की 78 लाख रुपये कीमत की खेप भी मिली, जिन पर एक ही बैच नंबर दर्ज था, जबकि असली दवाओं में हर स्ट्रिप का अलग रिकॉर्ड होता है। बंसल मेडिकल एजेंसी से यह भी दस्तावेज मिले कि उन्होंने कंपनी से जितना खरीदा, उससे कहीं ज्यादा बॉक्स बाजार में बेचे। यानी एक असली बॉक्स खरीदा गया और उसके नाम पर हजारों नकली बॉक्स बेचे गए।
इस मामले में हे मां मेडिको के संचालक हिमांशु अग्रवाल और बंसल मेडिकल एजेंसी के संजय बंसल समेत कई लोग पहले ही गिरफ्तार होकर जेल में हैं। हिमांशु अग्रवाल ने जांच रोकने के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने की कोशिश भी की थी। अधिकारियों का कहना है कि यह संगठित अपराध का हिस्सा है और इसमें कई राज्यों का नेटवर्क शामिल हो सकता है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और पुडुचेरी का औषधि विभाग अब मामले की गहराई से जांच कर रहा है। शुरुआती जांच से यह भी संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क ने लंबे समय तक स्वास्थ्य व्यवस्था को चकमा देकर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया। फिलहाल जांच जारी है और यह तय माना जा रहा है कि इस रैकेट से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
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