कोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री हटाने का दिया आदेश
दिल्ली की एक अदालत ने अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) को बड़ी राहत देते हुए कंपनी के खिलाफ प्रकाशित और प्रसारित की जा रही कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि पत्रकारों और विदेशी संगठनों द्वारा प्रकाशित असत्यापित सामग्री कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने लेखों, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट से ऐसी सामग्री तुरंत हटाएं या आदेश की तारीख से पांच दिनों के भीतर हटाना सुनिश्चित करें।
इस मामले की सुनवाई सीनियर सिविल जज अनुज कुमार सिंह की अदालत में चल रही है। अडाणी एंटरप्राइजेज का आरोप है कि कुछ पत्रकारों और विदेशी गैर-सरकारी संगठनों ने जानबूझकर paranjoy.in, adaniwatch.org और adanifiles.com.au जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भ्रामक सामग्री प्रकाशित की है। कंपनी का कहना है कि इन पोस्ट और रिपोर्ट्स का उद्देश्य उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा को धूमिल करना और व्यावसायिक संचालन को बाधित करना था। अदालत ने प्रथम दृष्टया कंपनी के पक्ष में मामला पाया और कहा कि सुविधा का संतुलन भी वादी के पक्ष में है।
प्रतिवादियों में परंजॉय गुहा ठाकुरता, रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, अयास्कंत दास, आयुष जोशी, बॉब ब्राउन फाउंडेशन, ड्रीमस्केप नेटवर्क इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, गेटअप लिमिटेड, डोमेन डायरेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड और जॉन डो शामिल हैं। अदालत ने इन सभी को अगली सुनवाई तक कंपनी के खिलाफ किसी भी प्रकार की असत्यापित, निराधार और मानहानिकारक रिपोर्ट प्रकाशित करने, वितरित करने या प्रसारित करने से रोक दिया है।
इसके अलावा, अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मध्यस्थों को भी आदेश दिया कि यदि उन्हें इस प्रकार की मानहानिकारक सामग्री की सूचना दी जाती है, तो वे सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत 36 घंटे के भीतर उसे हटा दें। अदालत ने साफ कहा कि यदि तत्काल सामग्री हटाना संभव नहीं है तो आदेश की तारीख से पांच दिनों के भीतर इसे अवश्य हटाया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अडाणी एंटरप्राइजेज को यह अधिकार होगा कि यदि उसे कोई नई मानहानिकारक सामग्री मिलती है, तो वह अतिरिक्त लिंक हटाने की मांग कर सकती है।
यह अंतरिम निषेधाज्ञा अडाणी ग्रुप के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है क्योंकि हाल के वर्षों में कंपनी को लेकर सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स पर कई नकारात्मक रिपोर्टें सामने आई हैं। अदालत के इस आदेश से फिलहाल कंपनी की साख को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लग गई है। मामले की अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि प्रतिवादी किस प्रकार इस आदेश का पालन करते हैं और क्या कंपनी द्वारा लगाए गए आरोपों को आगे प्रमाणित किया जा सकता है।
Share this content:
