May 1, 2026

‘मॉस्को नहीं, कीव में मिलो’, जेलेंस्की ने ठुकराया पुतिन का प्रस्ताव

यूक्रेन और रूस के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर शांति वार्ता की संभावनाओं पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मॉस्को में मिलने के प्रस्ताव को सख्ती से ठुकरा दिया है। जेलेंस्की ने कहा कि वह “आतंकवादियों की राजधानी” मॉस्को नहीं जा सकते, क्योंकि यूक्रेन हर दिन रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह साफ संदेश दिया कि अगर पुतिन मुलाकात चाहते हैं तो उन्हें कीव आना होगा।

जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय आया है जब सितंबर के शुरुआती दिनों में ही रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ पांच दिनों में 1,300 से अधिक ड्रोन, 900 बम और 50 से ज्यादा मिसाइलें यूक्रेन पर दागी गईं। इन हमलों से यूक्रेन के 14 अलग-अलग क्षेत्रों में भारी तबाही हुई है। ऐसे माहौल में जेलेंस्की का कहना है कि मॉस्को में बातचीत करना न केवल असंभव है बल्कि रूस की नीयत पर भी सवाल खड़े करता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने बातचीत की कोशिशों में जुटे हैं। इसके लिए हाल ही में अलास्का में पुतिन और ट्रंप की मुलाकात भी हुई थी। ट्रंप चाहते हैं कि जेलेंस्की और यूरोपीय देशों के नेता जल्द ही वॉशिंगटन पहुंचे, ताकि पुतिन और जेलेंस्की के बीच द्विपक्षीय या त्रिपक्षीय बैठक की जमीन तैयार हो सके। हालांकि, इस प्रक्रिया में रूस की ओर से अतिरिक्त शर्तें रखे जाने के कारण वार्ता की राह और कठिन होती जा रही है।

पुतिन ने पिछले दिनों कहा था कि वह जेलेंस्की से मिलने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह मुलाकात सिर्फ मॉस्को में ही संभव होगी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी स्पष्ट किया कि जेलेंस्की को मॉस्को बुलाया जा रहा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनसे “सरेंडर” करने को कहा जा रहा है। हालांकि, जेलेंस्की ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया और पेरिस में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान कहा कि अगर आप बैठक को रोकना चाहते हैं तो मुझे मॉस्को आमंत्रित करें, क्योंकि वहां जाकर कोई बातचीत संभव ही नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता फिलहाल दूर की कौड़ी है। एक तरफ रूस हमलों को तेज कर रहा है और शर्तों पर अड़ा हुआ है, वहीं यूक्रेन मॉस्को जाकर किसी भी तरह की बातचीत को अपनी संप्रभुता और गरिमा के खिलाफ मान रहा है। ऐसे में दुनिया की निगाहें अब अमेरिका और यूरोपीय देशों पर हैं कि क्या वे दोनों नेताओं को किसी साझा मंच पर ला पाएंगे या फिर यह संघर्ष आने वाले समय में और भड़क सकता है।

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