April 18, 2026

Swiggy और Zomato ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस, फूड ऑर्डर करना हुआ महंगा

त्योहारों से पहले ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कंपनियों ने ग्राहकों पर सीधा बोझ डाल दिया है। अब स्विगी और जोमैटो से खाना ऑर्डर करना और महंगा हो जाएगा, क्योंकि दोनों कंपनियों ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। प्लेटफॉर्म फीस वह अतिरिक्त शुल्क है, जिसे हर ऑर्डर पर ग्राहकों को चुकाना पड़ता है।

 

स्विगी ने अपने प्लेटफॉर्म शुल्क को कुछ चुनिंदा इलाकों में 12 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये कर दिया है। यह बदलाव मुख्य रूप से उन जगहों पर किया गया है, जहाँ से ज्यादा ऑर्डर आते हैं। कंपनी ने पहले इसे 14 रुपये तक बढ़ाया था, लेकिन अब एक रुपये और जोड़कर 15 रुपये कर दिया गया है। इस शुल्क में जीएसटी शामिल है। प्लेटफॉर्म फीस का मकसद डिलीवरी संचालन से जुड़ी लागत को कवर करना और कंपनी के मुनाफे को स्थिर बनाए रखना है।

 

दूसरी ओर, जोमैटो ने भी अपने ग्राहकों के लिए यह बोझ बढ़ा दिया है। कंपनी ने मंगलवार को घोषणा की कि उसकी प्लेटफॉर्म फीस अब 10 रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये कर दी जाएगी। खास बात यह है कि इसमें जीएसटी शामिल नहीं है। माना जा रहा है कि यह कदम त्योहारों के मौसम को देखते हुए उठाया गया है, क्योंकि इस दौरान ऑर्डर की संख्या में भारी इजाफा होता है। जोमैटो ने पिछली बार अक्टूबर 2024 में शुल्क बढ़ाया था, जबकि स्विगी ने यह क्रम अप्रैल 2023 से शुरू किया था।

 

जानकारी के मुताबिक, स्विगी ने अप्रैल 2023 में प्लेटफॉर्म फीस सिर्फ 2 रुपये तय की थी। इसके बाद धीरे-धीरे इसे बढ़ाते हुए अब 15 रुपये तक पहुँचा दिया गया है। वहीं जोमैटो भी इसी रणनीति पर चल रहा है। कंपनियों का कहना है कि औसतन 500 से 600 रुपये के ऑर्डर पर यह फीस बहुत कम है, लेकिन इससे उन्हें लागत कवर करने और मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलती है।

 

हालाँकि, ग्राहकों को यह बोझ भारी लग सकता है। खासकर ऐसे समय में जब स्विगी की वित्तीय स्थिति भी दबाव में है। अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का घाटा दोगुना होकर 1,197 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। इसकी मुख्य वजह इंस्टामार्ट बिज़नेस में बढ़ता निवेश है। हालांकि इसी अवधि में स्विगी की ऑपरेटिंग आय 54% बढ़कर 4,961 करोड़ रुपये हो गई, लेकिन कुल मिलाकर कंपनी का कैश आउटफ्लो 1,053 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

 

त्योहारों से पहले इस तरह की बढ़ोतरी ग्राहकों की जेब पर असर डालेगी। आम उपभोक्ता के लिए यह अतिरिक्त शुल्क भले ही छोटा लगे, लेकिन हर ऑर्डर पर बढ़ी हुई लागत उन्हें सोचने पर मजबूर करेगी कि ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना वाकई कितना सुविधाजनक और किफायती है।

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