भारत की सबसे लंबी फिल्म: ‘बाहुबली: द एपिक’ से भी ज्यादा लंबी है 1977 की तेलुगु फिल्म ‘दान वीर सूर कर्ण’
एस. एस. राजामौली की बाहुबली फ्रेंचाइजी ने भारतीय सिनेमा को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया. अब इसका खास वर्ज़न बाहुबली: द एपिक 31 अक्टूबर 2025 को रिलीज होने वाला है, जिसमें दोनों पार्ट्स को मिलाकर 5 घंटे 27 मिनट का रनटाइम होगा. हाल ही में रिलीज हुए इसके टीज़र के बाद से दर्शकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. लंबे रनटाइम वाली इस फिल्म को देखने के लिए फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा में इससे भी कहीं ज्यादा लंबी फिल्म मौजूद है? जी हाँ, साल 1977 में रिलीज हुई तेलुगु फिल्म दान वीर सूर कर्ण अब तक की सबसे लंबी भारतीय फिल्मों में से एक है. इस फिल्म का रनटाइम लगभग 9 घंटे 53 मिनट का था, जो बाहुबली: द एपिक से लगभग दोगुना है.
दान वीर सूर कर्ण को महान अभिनेता एन. टी. रामा राव ने न केवल लिखा और निर्देशित किया, बल्कि इसमें तीन अहम भूमिकाएँ भी निभाईं—कर्ण, दुर्योधन और कृष्ण. यह एक पौराणिक फिल्म थी, जो महाभारत की कथाओं पर आधारित थी. फिल्म की लंबाई के बावजूद उस दौर में इसे दर्शकों ने खूब सराहा और यह सिनेमाई इतिहास में अपनी खास जगह बनाने में सफल रही.
बॉक्स ऑफिस की बात करें तो यह फिल्म महज 10 लाख रुपये के बजट में बनी थी. 1977 में पहली बार रिलीज पर इसने 1.5 करोड़ रुपये की कमाई की, जो उस वक्त के हिसाब से बड़ी सफलता थी. बाद में साल 1994 में दोबारा रिलीज पर इसने करीब 1 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. इसके अधिकार (राइट्स) 60 लाख रुपये में बिके थे. इस तरह इसकी कुल कमाई 2.5 करोड़ रुपये रही.
आज भी दान वीर सूर कर्ण भारतीय सिनेमा की सबसे लंबी फिल्मों में छठे स्थान पर गिनी जाती है. वहीं, बाहुबली: द एपिक अपनी भव्यता, विजुअल इफेक्ट्स और शानदार कहानी की वजह से एक अलग अनुभव देने वाली है. यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय दर्शकों की लंबे रनटाइम वाली फिल्मों के प्रति जिज्ञासा और उत्साह आज भी उतना ही मजबूत है, जितना दशकों पहले था.
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