May 1, 2026

हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन का कहर, जनजीवन अस्त-व्यस्त

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी वर्षा और उसके बाद भी जारी भूस्खलन व बाढ़ ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार रात से लेकर बुधवार तक प्रदेश के कई जिलों में हालात बेहद खराब बने रहे। सोलन जिले के दून विधानसभा क्षेत्र में राजकीय प्राथमिक पाठशाला शेरला का भवन बारिश और जमीन धंसने से पूरी तरह ढह गया। गनीमत यह रही कि हादसे के समय भवन खाली था। वहीं कसौली के गढ़खल-गुनाई वाया मध्याना मार्ग पर गोड़ती के पास भूस्खलन होने से सड़क धंसने का खतरा मंडराने लगा है। यहां पर जमीन खिसकने से 100 मीटर गहरी खाई बन गई है, जिसके चलते स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।

सिरमौर जिले की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाड़थल मधाना के पास जमीन करीब सात फीट तक धंस गई है। इससे स्कूल भवन को खतरा पैदा हो गया है और यदि स्थिति बिगड़ी तो भवन गिर सकता है। उधर शिमला जिले में भूस्खलन और सड़कें बाधित होने से सब्जी मंडी तक फूलगोभी और मटर जैसी फसलें नहीं पहुंच पा रही हैं। किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस समय दो राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 582 सड़कें बंद हैं। कुल्लू जिले में एनएच-305 और मंडी में एनएच-3 पर यातायात पूरी तरह ठप पड़ा है। यही नहीं, बिजली और पानी की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। प्रदेशभर में 1155 ट्रांसफार्मर और 346 पेयजल योजनाएं बंद हो चुकी हैं।

कांगड़ा जिले में हालात और भी ज्यादा बिगड़ गए हैं। यहां पौंग बांध का जलस्तर खतरे के निशान से तीन फीट ऊपर पहुंच गया है। इसके चलते ब्यास नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी छोड़े जाने से फतेहपुर और इंदौरा विधानसभा क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मंगलवार रात को जलस्तर में अचानक आई वृद्धि के कारण इंदौरा स्थित अरनी विश्वविद्यालय का परिसर पानी से भर गया। इस दौरान 427 विद्यार्थी और स्टाफ के सदस्य अंदर ही फंस गए थे।

हालात की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम इंदौरा सुरेंद्र ठाकुर ने तुरंत एनडीआरएफ की टीम मौके पर भेजी। टीम ने रातभर रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी विद्यार्थियों और स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला। बुधवार को भी राहत और बचाव कार्य जारी रहा और एनडीआरएफ ने पानी में फंसे 41 अन्य लोगों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज कर दिए गए हैं।

प्रदेश में बुधवार को मौसम साफ जरूर रहा, लेकिन मुश्किलें कम नहीं हुईं। सड़कें बंद होने, बिजली-पानी ठप पड़ने और बाढ़ के खतरे से लोग दहशत में हैं। किसान से लेकर आम नागरिक तक इस आपदा का खामियाजा भुगत रहे हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलों के प्रशासन को अलर्ट पर रखा है और प्रभावित इलाकों में अस्थायी राहत शिविर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक हालात सामान्य होने की संभावना कम है, ऐसे में लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।

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