डोनाल्ड ट्रंप, असीम मुनीर और पाकिस्तान के 12 टुकड़े करने की साज़िश
पाकिस्तान एक नए भूचाल की ओर बढ़ता दिख रहा है। खबर है कि अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति और कारोबारी डोनाल्ड ट्रंप का परिवार पाकिस्तान की ज़मीन और संसाधनों पर बड़ा खेल खेल रहा है। ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर लाहौर पहुंच चुके हैं और वहां उन्होंने रियल एस्टेट व तेल कारोबार का दफ्तर भी खोल लिया है। यह कदम केवल व्यापार नहीं, बल्कि पाकिस्तान को टुकड़ों में बांटकर लूटने की साज़िश का हिस्सा बताया जा रहा है। इस पूरे खेल में पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल बताए जा रहे हैं।
फिलहाल पाकिस्तान चार सूबों में बंटा है – पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा। लेकिन अब चर्चा इस बात की है कि इसे 12 हिस्सों में तोड़ा जाए। सूत्रों के मुताबिक पंजाब को चार हिस्सों, बलूचिस्तान को चार हिस्सों, सिंध को दो हिस्सों और खैबर पख्तूनख्वा को दो हिस्सों में बांटने की योजना बनाई जा रही है। इस विभाजन के पीछे असल मकसद तेल और रेयर अर्थ मेटल्स की खुली लूट है। ट्रंप परिवार और पाकिस्तानी सेना इस सौदे में हिस्सेदार होंगे, जबकि आम जनता को गृहयुद्ध जैसे हालात का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप की योजना यह है कि पाकिस्तान में मौजूद तेल और खनिज संसाधनों को अमेरिकी कंपनियों और उनके परिवार की कारोबारी नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचा जाए। बदले में पाकिस्तानी सेना और मुनीर-शहबाज की जोड़ी को भारी मुनाफा मिलेगा। अनुमान है कि अगले पांच साल में पाकिस्तानी सेना इस डील से करीब 3 लाख करोड़ रुपये कमा सकती है। यही वजह है कि सेना के शीर्ष जनरल इस सौदे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
सूत्रों का दावा है कि जेरेड कुशनर ने लाहौर में बैठकों के दौरान पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों और कारोबारियों से मुलाकात की। यहां उन्होंने सुरक्षा की गारंटी और अमेरिकी निवेश की राह साफ करने के लिए प्रांतों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव रखा। यह कदम पाकिस्तान को कमजोर करने और बाहरी ताकतों के लिए वहां सीधी दखलअंदाजी आसान बनाने वाला माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर असीम मुनीर और शहबाज शरीफ पाकिस्तान को तोड़ने पर क्यों आमादा हैं? जानकारों के मुताबिक पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और सेना का घटता कद उन्हें ट्रंप परिवार जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों पर निर्भर बना रहा है। पाकिस्तान की सेना पहले ही कंपनियां चलाकर मुनाफा कमाती रही है और अब तेल कारोबार में अमेरिकी साझेदारी उनके लिए सुनहरा अवसर है। लेकिन इस सौदे की कीमत पाकिस्तान की एकता और जनता की स्थिरता चुकानी पड़ सकती है।
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