April 30, 2026

डोनाल्ड ट्रंप का दावा – 6 महीने में खत्म कराईं 6 जंग, 5 सबको पता लेकिन 1 का जन्म ही नहीं हुआ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के सिर्फ छह महीने में दुनिया की छह बड़ी जंगों को खत्म कराया है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात के दौरान कहा कि वे हर महीने एक युद्ध को रोकने में कामयाब हो रहे हैं। उन्होंने खुद को “पीसमेकर इन चीफ” बताया, जबकि विरोधियों का कहना है कि ट्रंप की ये रणनीति सिर्फ नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की चाह से जुड़ी है।

 

ट्रंप के अनुसार, भारत-पाकिस्तान, इजराइल-ईरान, कंबोडिया-थाइलैंड, कॉन्गो-रवांडा जैसे संघर्षों को शांत कराने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। हालांकि भारत ने उनके दावे को नकारते हुए साफ कहा कि पाकिस्तान खुद युद्धविराम की अपील लेकर आया था और किसी तीसरे देश की मध्यस्थता इसमें शामिल नहीं थी। इस पर भारत के विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक बयान दे चुके हैं कि किसी बाहरी दबाव में कोई फैसला नहीं हुआ।

 

इजराइल और ईरान के बीच हाल ही में छिड़े संघर्ष को भी ट्रंप ने शांति वार्ता से शांत कराया। इजराइल ने 13 जून को ईरान पर बड़े हमले किए थे, जिसके बाद हालात युद्ध की ओर बढ़ गए थे। लेकिन 23 जून को अमेरिकी मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच सीजफायर की घोषणा हुई। इसी तरह कॉन्गो और रवांडा ने भी 27 जून को वाशिंगटन में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे ट्रंप ने अपनी बड़ी उपलब्धि बताया।

 

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कोसोवो और सर्बिया के बीच होने वाली संभावित जंग को जन्म ही नहीं लेने दिया। उनका कहना था कि सर्बिया युद्ध की तैयारी कर रहा था लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया कि वह युद्ध करने वाले देशों से व्यापार नहीं करेगा। इस दबाव के बाद हालात बिगड़ने से पहले ही काबू में आ गए। हालांकि सर्बिया ने युद्ध की किसी योजना से साफ इनकार किया है।

 

कंबोडिया और थाइलैंड में जुलाई महीने में छिड़े खूनी संघर्ष को भी ट्रंप ने रोकने का श्रेय लिया है। दोनों देशों के बीच 28 जुलाई को युद्धविराम लागू हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्यापारिक वार्ता रोकने की धमकी दी। वहीं मिस्र और इथोपिया के बीच नील नदी विवाद को लेकर चल रही तनातनी पर भी ट्रंप ने कहा है कि वे जल्द ही इसका स्थायी समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा कि यह पानी मिस्र के लिए जीवन रेखा है और इसे छीना नहीं जा सकता।

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