May 1, 2026

कांग्रेस ने 11 साल बाद किए जिला अध्यक्षों के ऐलान, हुड्डा का दबदबा, शैलजा को भी मिली हिस्सेदारी, नेता विपक्ष पर टिकी निगाहें

हरियाणा: लंबे इंतज़ार और आंतरिक खींचतान के बाद कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नाम घोषित कर दिए हैं। मंगलवार शाम पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने इन नियुक्तियों का ऐलान किया। खास बात यह है कि 11 साल बाद हरियाणा में कांग्रेस का जिला स्तरीय संगठन गठित हुआ है। इस दौरान पार्टी लगातार सत्ता से बाहर रही, लेकिन संगठन निर्माण की प्रक्रिया भी ठप पड़ी रही।

 

जारी सूची में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का प्रभाव साफ दिखाई देता है। अधिकांश नए जिला अध्यक्ष उनके करीबी माने जा रहे हैं। हालांकि, पार्टी ने कुमारी शैलजा को पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया और उनके कुछ समर्थकों को भी जगह दी गई है। इस सूची में केवल एक महिला जिला अध्यक्ष बनाई गई हैं—संतोष बेनीवाल, जिन्हें सिरसा जिला कांग्रेस कमेटी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि यह नियुक्तियां ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत की गई हैं। प्रत्येक जिले में एआईसीसी पर्यवेक्षकों ने समीक्षा कर स्थानीय नेताओं से बातचीत की और फिर अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी। इसके बाद चर्चा कर अंतिम नाम तय किए गए। पार्टी ने जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बनाने पर जोर दिया है, जिसमें जाट, ब्राह्मण, राजपूत, पिछड़ा वर्ग, बनिया और पंजाबी समुदायों का प्रतिनिधित्व शामिल है।

 

इस लिस्ट में 2024 विधानसभा चुनाव में हारने वाले कई नेता भी शामिल हैं, जैसे—परविंदर परी (अंबाला कैंट), अनिरुद्ध चौधरी (भिवानी ग्रामीण) और वर्धन यादव (गुरुग्राम ग्रामीण)। इसके अलावा पवन अग्रवाल (अंबाला शहर), अरविंद शर्मा (फतेहाबाद), पंकज डावर (गुरुग्राम शहरी), नेत्रपाल अधाना (पलवल), बलवान सिंह (रोहतक) और बलजीत कौशिक (फरीदाबाद) को भी जिला अध्यक्ष बनाया गया है।

 

जानकारों का कहना है कि यह नियुक्तियां हरियाणा कांग्रेस में आगामी विधानसभा सत्र से पहले शक्ति संतुलन का संकेत देती हैं। 22 अगस्त से मानसून सत्र शुरू होना है और संभावना जताई जा रही है कि उससे पहले कांग्रेस विधायक दल के नेता का नाम भी तय किया जाएगा। पार्टी चाहती है कि सत्र में विपक्ष का नेतृत्व करने वाला चेहरा स्पष्ट हो, ताकि सत्ता पक्ष पर आक्रामक तरीके से दबाव बनाया जा सके।

 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति न केवल संगठन को ज़मीन पर मज़बूत करेगी बल्कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए रणनीतिक तैयारी की नींव भी रखेगी। हालांकि, हुड्डा और शैलजा गुट के बीच संतुलन बनाए रखना आने वाले समय में प्रदेश कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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