April 30, 2026

भारत-पाक तनाव: सिंधु जल समझौता निलंबित, युद्ध की धमकियों के बीच बढ़ा विवाद

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया है। इस फैसले से पाकिस्तान बौखला गया है और लगातार युद्ध की धमकी दे रहा है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर से लेकर विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो तक, पाकिस्तानी नेतृत्व का कहना है कि जल प्रवाह रोके जाने से उनका देश भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएगा। वहीं भारत ने साफ कर दिया है कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बहेंगे” और अपनी योजना के तहत जल निकासी और बांध निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि अगर सिंधु जल संधि निलंबित रही या भारत ने नए बांध बनाए, तो जंग छिड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान की जल आपूर्ति में कटौती की गई, तो इसका जवाब युद्ध से दिया जाएगा। बिलावल का यह भी दावा है कि सिंध के लोग कभी भी अपनी नदी के खतरे में होने पर चुप नहीं बैठेंगे। वह पहले भी इस मुद्दे पर भारत को धमकी दे चुके हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने का ऐलान कर चुके हैं।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भी अमेरिका में अपने संबोधन में चेतावनी दी कि अगर भारत ने जल प्रवाह को बाधित किया, तो पाकिस्तान भारतीय बुनियादी ढांचे को तबाह कर देगा। उन्होंने यहां तक कहा कि पाकिस्तान एक परमाणु राष्ट्र है और अगर वह डूबा, तो आधी दुनिया को अपने साथ ले डूबेगा। आसिम के मुताबिक, भारत के फैसले से 25 करोड़ पाकिस्तानी भुखमरी के खतरे का सामना करेंगे और भारत के बांध बनने का इंतजार किए बिना उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इस मुद्दे पर साफ कहा था कि यह नदियां भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का हिस्सा हैं और भारतीय किसानों के हित में हैं। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान को दिए गए तरजीही राष्ट्र का दर्जा, वीजा सुविधाएं और सीमा व्यापार पहले ही समाप्त किए जा चुके हैं। अब सिंधु जल संधि पर रोक राष्ट्रीय हित में लगाई गई है।

भारत की योजना के तहत चिनाब नदी पर रणबीर नहर का विस्तार, बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और पानी के मोड़ के जरिए पश्चिमी नदियों के प्रवाह को कम करने पर काम चल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी को उत्तर भारतीय राज्यों की नदियों में मोड़ने का भी प्रस्ताव है। यह सब पाकिस्तान के लिए जल संकट को और गहरा सकता है। वहीं, 1960 की इस संधि में भारत को सीमित उपयोग की अनुमति थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और भारत स्पष्ट संदेश दे रहा है कि आतंक और पानी का रिश्ता अब खत्म हो चुका है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!