April 21, 2026

बिहार SIR मामला: मतदाता सूची से हटाए गए नामों की अलग लिस्ट नहीं निकालेगा चुनाव आयोग

बिहार में चल रहे SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चुनावी माहौल गर्म है। विपक्ष सरकार और चुनाव आयोग पर मतदाता सूची से जबरन नाम हटाने के आरोप लगा रहा है। इस बीच, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि मसौदा मतदाता सूची से बाहर किए गए व्यक्तियों की अलग सूची प्रकाशित करने का वह नियमों के तहत बाध्य नहीं है।

 

चुनाव आयोग ने अदालत में दायर हलफनामे में यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए हैं, उन्हें अलग से कारण बताने की भी आवश्यकता नहीं है। आयोग ने बताया कि मसौदा मतदाता सूची राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई गई है और जिनके नाम नहीं हैं, वे फार्म भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं।

 

हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना पूर्व सूचना, सुनवाई का अवसर और ठोस कारण के सूची से नहीं हटाया जाएगा। आयोग के अनुसार, बिहार के 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ लोगों ने अपने नाम की पुष्टि या फार्म जमा किए हैं। इस प्रक्रिया में हजारों BLO, स्वयंसेवक और बूथ स्तर एजेंट सक्रिय रहे।

 

विवाद तब बढ़ा जब ADR ने आरोप लगाया कि 65 लाख मतदाताओं को गलत तरीके से सूची से बाहर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 6 अगस्त को आयोग से हलफनामा मांगा था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को होनी है।

 

चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 1 अगस्त 2025 को जारी की गई थी और आपत्तियां दर्ज कराने का समय दिया गया था, लेकिन अब तक किसी राजनीतिक दल ने औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!