मथुरा एनकाउंटर: नीरज अपराधी था या नहीं? पहले ही अपराध में सीधे मुठभेड़ में ढेर, पुलिस पर उठे सवाल
मथुरा के फरह क्षेत्र में चांदी व्यापारी से लूट के मामले में हुए पुलिस एनकाउंटर ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एनकाउंटर में मारा गया युवक नीरज, जो सैंया के धाना गांव का रहने वाला था, उसके परिजन अब इसे ‘फर्जी मुठभेड़’ करार दे रहे हैं। गांव में सन्नाटा पसरा है और परिवार शोक के साथ-साथ आक्रोश में है। नीरज का यह पहला बड़ा मामला था और उसी में उसका सीधे एनकाउंटर हो जाना अब कई सवाल खड़े कर रहा है।
नीरज के बड़े भाई जितेंद्र का कहना है कि उनके छोटे भाई को पुलिस ने मार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने नीरज के कमरे को सील कर ताला जड़ दिया और चाबी अपने साथ ले गए। परिजनों को डर है कि पुलिस अब कमरे से कोई फर्जी सबूत निकालकर उनके भाई को गलत तरीके से अपराधी साबित करने की कोशिश कर सकती है। उनका कहना है कि पुलिस की कार्रवाई पूर्व नियोजित और दुर्भावनापूर्ण थी।
मृतक की भाभी सीमा ने भावुक होते हुए बताया कि पुलिस वालों ने नीरज के कमरे में घुसकर तलाशी ली और कुछ थैले लेकर बाहर जाते दिखे। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मी उन्हें धमका रहे थे और बंदूक दिखाकर डराया भी गया। उनका आरोप है कि नीरज को बिना किसी ठोस सबूत के मार डाला गया। पुलिस ने अगले ही दिन उसकी मौत की सूचना दी, जो उन्हें स्तब्ध कर गई।
घटना के बाद रविवार को कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि नीरज के घर पहुंचे। इन संगठनों ने परिवार को इंसाफ दिलाने का आश्वासन दिया और कहा कि इस मामले को मानवाधिकार आयोग तक ले जाया जाएगा। परिवार भी अब अपनी शिकायत मुख्यमंत्री और डीजीपी तक पहुंचाने की तैयारी में है। मंगलवार को वे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और सुनवाई नहीं होने की स्थिति में बड़ा कदम उठाने की चेतावनी दे रहे हैं।
इस पूरे मामले ने यूपी पुलिस की एनकाउंटर नीति पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई नीरज अपराधी था? या यह एनकाउंटर जल्दबाजी में लिया गया फैसला था? इन सवालों का जवाब अब शासन और पुलिस दोनों को देना होगा, क्योंकि परिवार और समाज का भरोसा इन पर टिका है।
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