April 30, 2026

बचपन में ही बना डाली करोड़ों की कंपनी, इन भारतीय बच्चों ने रच दिया इतिहास

भारत में कुछ ऐसे होनहार बच्चे हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही अपने सपनों को हकीकत में बदलकर करोड़ों की कंपनियों की नींव रखी। जब ज्यादातर बच्चे खेल-कूद या पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं, तब इन बच्चों ने बिजनेस की दुनिया में कदम रखकर मिसाल पेश की। इन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए उम्र नहीं, बल्कि जुनून और मेहनत जरूरी होती है।

मुंबई के तिलक मेहता ने मात्र 13 साल की उम्र में ‘Papers N Parcels’ नामक एक स्टार्टअप शुरू किया, जो एक ही दिन में डिलीवरी की सुविधा देता है। उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध डब्बावालों के नेटवर्क का बखूबी इस्तेमाल किया। आज उनकी कंपनी 100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर रही है और वह युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।

गुजरात के हर्षवर्धन ज़ाला ने 15 साल की उम्र में ‘Aerobotics7’ नामक कंपनी शुरू की और एक ऐसा ड्रोन विकसित किया जो जमीन में छिपे लैंडमाइंस का पता लगा सकता है। उनके इस इनोवेशन को कई सरकारी और निजी संस्थानों ने सराहा है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से जान-माल की सुरक्षा में मदद मिल सकती है।

ओडिशा के रितेश अग्रवाल का नाम तो अब पूरी दुनिया जानती है। उन्होंने सिर्फ 16 साल की उम्र में OYO Rooms की शुरुआत की। सस्ते और अच्छे होटल्स की जरूरत को समझते हुए उन्होंने OYO को एक ग्लोबल ब्रांड में बदल दिया। आज रितेश अग्रवाल देश के सबसे युवा अरबपतियों में से एक हैं।

इसी तरह अद्वैत ठाकुर ने 12 साल की उम्र में Apex Infosys India की नींव रखी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वेब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करती है। अब 22 साल की उम्र में अद्वैत की कंपनी की वैल्यू करीब 10 करोड़ रुपये है। उन्होंने यह दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

इन युवाओं की सफलता सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सामाजिक प्रेरणा भी है। इन्होंने यह दिखाया कि भारत के बच्चे न केवल भविष्य हैं, बल्कि वर्तमान में भी बदलाव ला सकते हैं। इनके जुनून, नवाचार और साहस ने यह साबित कर दिया कि सपनों को साकार करने की कोई तय उम्र नहीं होती।

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