आगरा से बरेली पहुंचने में अब सिर्फ ढाई घंटे, 7700 करोड़ की लागत से बन रहा 228 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे
उत्तर प्रदेश में आगरा से बरेली तक का सफर अब बहुत जल्द आसान और तेज़ होने वाला है। देश की राजधानी से करीब 228 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे बन रहा है, जिसकी कुल लागत 7700 करोड़ रुपये है। इस बड़े प्रोजेक्ट के पहले चरण का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और इसके बन जाने के बाद आगरा से बरेली की यात्रा सिर्फ ढाई घंटे में पूरी हो जाएगी। फिलहाल यहां जाने में पांच से छह घंटे लग जाते हैं, लेकिन यह एक्सप्रेस-वे इस दूरी को काफी कम कर देगा।
इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधीन किया जा रहा है। मथुरा से बरेली के बीच बनने वाला यह फोर लेन ग्रीन कॉरिडोर एक हाईस्पीड हाईवे होगा। पहले चरण में मथुरा से हाथरस तक 66 किलोमीटर का मार्ग बन रहा है, जिसका करीब आधा हिस्सा तैयार हो चुका है और वहां यातायात भी शुरू हो चुका है। दूसरे चरण में हाथरस से कासगंज तक 57 किलोमीटर, फिर कासगंज से बदायूं तक 46 किलोमीटर और बदायूं से बरेली तक 59 किलोमीटर रोड बनाई जा रही है।
यह एक्सप्रेस-वे आधुनिक तकनीक से सुसज्जित होगा जिसमें 20 फ्लाईओवर, 26 अंडरपास, 5 बड़े पुल और 6 रेलवे ओवर ब्रिज शामिल हैं। ये सभी सुविधाएं यात्रा को सुविधाजनक और सुरक्षित बनाएंगी। एनएचएआई के परियोजना अधिकारी उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि दूसरे चरण का लगभग 30 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अगले एक साल में इसे भी पूरा कर लिया जाएगा। पूरा प्रोजेक्ट वर्ष 2027 तक समाप्त होने की उम्मीद है।
आगरा-बरेली एक्सप्रेस-वे से न सिर्फ यात्रा में लगने वाला समय कम होगा बल्कि ट्रैफिक जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी। एनएचएआई के परियोजना निदेशक संदीप यादव ने बताया कि यह ग्रीन कॉरिडोर आगरा, मथुरा और बरेली के बीच सीधे कनेक्शन प्रदान करेगा, जिससे आसपास के जिलों के लोगों को भी काफी सुविधा होगी। इससे इलाके का आर्थिक विकास भी प्रोत्साहित होगा।
इसके अलावा, यह मार्ग पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे यात्रा के दौरान प्रदूषण में भी कमी आएगी। सड़क की गुणवत्ता बेहतर होने से वाहन दुर्घटना की संभावना भी कम होगी और यात्रियों को एक सुरक्षित सफर का अनुभव मिलेगा।
इस तरह, यह एक्सप्रेस-वे क्षेत्रीय विकास और कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा। आगरा से बरेली की दूरी घटने से व्यापार, पर्यटन और रोज़मर्रा की यात्रा में भी सुधार होगा। जल्द ही यह हाईवे बनकर तैयार होगा और यात्रियों के लिए सुविधा और गति दोनों में वृद्धि करेगा।
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