भारत के निर्यातकों की मांग: ट्रंप के टैरिफ फैसले पर सरकार से राहत की अपील
अमेरिका द्वारा भारत से होने वाले निर्यात पर 25% तक टैरिफ लगाने के फैसले ने भारतीय उद्योग जगत में चिंता बढ़ा दी है। यह नया आयात शुल्क 7 अगस्त 2025 से प्रभावी होने जा रहा है, जिससे भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों ने केंद्र सरकार से राहत पैकेज और विशेष प्रोत्साहन की मांग की है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ हुई बैठक में निर्यातकों ने स्पष्ट किया कि भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकाए रखने के लिए उन्हें सस्ती वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि चीन और वियतनाम जैसे देश जहां 2–4% की ब्याज दरों पर लोन उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं भारत में यह दर 8–12% तक है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पाद महंगे पड़ रहे हैं और खरीदार दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि सरकार प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को विस्तार दे और निर्यातकों को टैक्स राहत व सब्सिडी जैसे राजकोषीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराए। इसके अलावा, अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करने के लिए निर्यात के अन्य बाजारों की तलाश को प्राथमिकता देने की मांग भी सामने आई।
निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका को होने वाला निर्यात भारत के लिए महत्वपूर्ण है। कपड़ा, रत्न-आभूषण, झींगा, चमड़ा, रसायन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए अमेरिका एक बड़ा उपभोक्ता है। इन पर शुल्क लगने से न केवल ऑर्डर कम होंगे, बल्कि इनकी वैश्विक हिस्सेदारी भी घट सकती है।
सरकार की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वाणिज्य मंत्रालय जल्द ही लघु और मध्यम निर्यातकों के लिए एक राहत पैकेज की घोषणा कर सकता है। इसके अलावा, भारत WTO के जरिए अमेरिका के इस टैरिफ फैसले को चुनौती देने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।
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