रूस-अमेरिका में बढ़ता तनाव, ट्रंप की पनडुब्बी तैनाती से गूंजा 1962 का क्यूबा संकट
अमेरिका और रूस के बीच तनाव अब हथियारों की तैनाती तक जा पहुंचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के नजदीकी समुद्री क्षेत्रों में दो परमाणु पनडुब्बियां तैनात करने का आदेश दिया है। यह फैसला रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के उस बयान के बाद आया है, जिसे अमेरिका ने परमाणु हमले की चेतावनी के रूप में लिया। ट्रंप के इस कदम के बाद एक बार फिर 1962 के अक्टूबर की यादें ताजा हो गई हैं, जब क्यूबा मिसाइल संकट के चलते अमेरिका और सोवियत संघ परमाणु युद्ध के करीब पहुंच गए थे।
1962 में सोवियत संघ ने क्यूबा में गुप्त रूप से परमाणु मिसाइलें तैनात की थीं ताकि अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई का जवाब दिया जा सके। क्यूबा, अमेरिका के फ्लोरिडा से मात्र 90 मील की दूरी पर स्थित है, जिससे लाखों अमेरिकी नागरिकों की जान को खतरा पैदा हो गया था। अमेरिका ने जब इसकी जानकारी पाई तो राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने क्यूबा की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत से हल निकाला गया और युद्ध टला।
कई जानकार मान रहे हैं कि मौजूदा घटनाक्रम उसी ऐतिहासिक संकट की पुनरावृत्ति जैसा लग रहा है। ट्रंप द्वारा पनडुब्बियां तैनात करने और रूस के ‘डेड हैंड सिस्टम’ की चर्चाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। यह वही ऑटोमैटिक परमाणु जवाबी हमले की प्रणाली है, जिसे रूस ने शीत युद्ध के दौर में विकसित किया था।
क्यूबा संकट के बाद अमेरिका और रूस ने परमाणु हथियारों की दौड़ को सीमित करने के लिए कई प्रयास किए थे। दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत के लिए हॉटलाइन स्थापित की गई और 1963 में आंशिक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि पर भी सहमति बनी। लेकिन मौजूदा हालात इस दिशा में एक खतरनाक पलटाव की ओर इशारा कर रहे हैं।
दुनिया की निगाहें अब इन दोनों महाशक्तियों पर टिकी हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो हालात और बिगड़ सकते हैं और वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
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