May 5, 2026

मोदी का मिशन मालदीव: ‘इंडिया आउट’ से लेकर सामरिक जीत तक की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ब्रिटेन और मालदीव की कूटनीतिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस दौरे के दौरान वे मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह पहली बार होगा जब राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के कार्यकाल में कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष मालदीव की राजकीय यात्रा पर जाएगा। इस आमंत्रण को भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, खासतौर पर इसलिए क्योंकि मुइज्जू वही नेता हैं जिन्होंने सत्ता में आने से पहले ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया था।

 

भारत और मालदीव का रिश्ता दक्षिण एशिया की सबसे अहम रणनीतिक साझेदारियों में से एक है। हालांकि, 2023 में जब मुइज्जू सत्ता में आए तो यह संबंध संकट में दिखा। तब यह माना गया कि भारत ने शायद मालदीव जैसे अहम समुद्री साझेदार को खो दिया है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की सधी हुई कूटनीति, आर्थिक सहायता और भरोसेमंद संवाद के चलते यह समीकरण फिर से बदला।

 

बीते दो वर्षों में भारत ने मालदीव को 400 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद, करेंसी स्वैप सुविधा और डिफेन्स सहयोग जैसे कई ठोस समर्थन दिए। साथ ही फेरी सेवाओं के विस्तार और राजनीतिक संवाद की निरंतरता से दोनों देशों के बीच भरोसा फिर कायम हुआ। जनवरी और मई 2025 में दोनों देशों के बीच हुई HLCG बैठकों ने भी रणनीतिक स्थिरता की पुष्टि की।

 

पीएम मोदी की यह मालदीव यात्रा तीसरी है। इससे पहले उन्होंने 2018 में राष्ट्रपति सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह और 2019 में द्विपक्षीय यात्रा की थी। इस बार वे मालदीव की 60वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ पर मुख्य अतिथि होंगे, जिससे स्पष्ट होता है कि भारत-मालदीव संबंध अब नई मजबूती की ओर बढ़ रहे हैं।

 

यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि चीन को भी यह संकेत देती है कि भारत की कूटनीतिक पकड़ इस क्षेत्र में अब भी मजबूत है। ‘मिशन मालदीव’ शांत लेकिन निर्णायक रूप से यह संदेश देता है कि दक्षिण एशिया में भारत अब भी रणनीतिक धुरी बना हुआ है।

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