कैश कांड में जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दी याचिका, इन-हाउस रिपोर्ट और महाभियोग सिफारिश को दी चुनौती
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने आवास पर कैश मिलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर उस इन-हाउस जांच रिपोर्ट को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया गया था। इसके साथ ही उन्होंने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना द्वारा की गई महाभियोग की सिफारिश को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
जस्टिस वर्मा मार्च 2025 में उस समय विवादों में आए थे, जब उनके सरकारी आवास पर आग लगने के बाद वहां जली हुई नोटों की गड्डियां मिली थीं। दिल्ली फायर सर्विस ने आग बुझाने के दौरान घर के स्टोर रूम में जल चुके 500-500 रुपये के नोटों की कई गड्डियां बरामद की थीं। मामला तूल पकड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक इन-हाउस जांच समिति गठित की थी।
इस जांच में 55 से अधिक गवाहों के बयान, फॉरेंसिक सबूत और फायर ब्रिगेड की रिपोर्ट के आधार पर समिति ने जस्टिस वर्मा और उनके परिवार को कैश रखने और सबूत मिटाने का “प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से” दोषी माना था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि आग लगने के बाद सबूतों को नष्ट करने के लिए रातों-रात कैश हटाया गया।
इसके बाद तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने 8 मई को इस रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी थी। अब यह माना जा रहा है कि संसद के आगामी मानसून सत्र में सरकार जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश कर सकती है।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ रचा गया षड्यंत्र बताया है। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष नहीं थी और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। इसी आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जांच रिपोर्ट और सिफारिशों को रद्द करने की मांग की है।
यह मामला अब देश की न्यायिक प्रणाली और संवैधानिक प्रक्रिया के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा बनता जा रहा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की भूमिका और सरकार की कार्रवाई दोनों पर निगाहें टिकी हुई हैं।
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