सावन में चंद्रमा को अर्घ्य देने से बदल सकती है किस्मत, जानिए कैसे बनेंगे सारे काम आसान
सावन का महीना भगवान शिव की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शुभ कालखंड में चंद्रमा को अर्घ्य देना भी आपकी किस्मत को बदल सकता है? ज्योतिष और धर्मशास्त्र दोनों ही इस परंपरा को शुभ और फलदायी मानते हैं। चंद्रमा न केवल भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं, बल्कि हमारे जीवन में मन, भावनाएं और मानसिक संतुलन के प्रतिनिधि भी हैं। ऐसे में सावन की पावन संध्या पर चंद्रमा को अर्घ्य देना सीधे शिव कृपा का माध्यम बन जाता है।
ज्योतिष के अनुसार, यदि कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या पीड़ित अवस्था में हो तो व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, तनाव, स्वास्थ्य समस्याएं और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। लेकिन सावन में विशेष तिथियों पर चंद्रदेव को अर्घ्य देने से मन को शांति मिलती है, विचारों में स्पष्टता आती है और जीवन में रुके हुए कार्य गति पकड़ते हैं।
अर्घ्य देने की विधि भी बेहद सरल है। चांदी या तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें, उसमें थोड़ा दूध, चावल, मिश्री और सफेद फूल डालें। चंद्रमा के उदय के समय, खुले आसमान के नीचे खड़े होकर दोनों हाथों से जल अर्पित करें और साथ ही ‘ॐ सों सोमाय नमः’ या ‘ॐ चंद्राय नमः’ मंत्र का जाप करें। इस दौरान मन में सकारात्मकता और मनोकामना का भाव जरूर रखें।
सावन के सोमवार, पूर्णिमा, श्रावणी अमावस्या और रक्षाबंधन से पहले की रातें अर्घ्य देने के लिए सबसे शुभ मानी जाती हैं। विशेषकर सावन सोमवार को रात के समय यह उपाय करने से भगवान शिव और चंद्रदेव दोनों की कृपा एक साथ मिलती है, जिससे भाग्य के बंद दरवाज़े खुलने लगते हैं।
सावन में यह छोटा-सा उपाय न केवल आपके मन को शांति देगा, बल्कि जीवन के कई कठिन मोड़ों को भी सरल बना सकता है। इसलिए इस आध्यात्मिक अवसर को हाथ से न जाने दें और सावन की रातों को चंद्रदेव के प्रकाश में अपनी प्रार्थनाओं को अर्पित करें।
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