इजराइल में नेतन्याहू सरकार पर मंडराया संकट, येशिवा विवाद में टूटा गठबंधन, कुर्सी पर खतरा
गाजा में जारी युद्ध और देश के भीतर बढ़ते तनाव के बीच इजराइल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को उस समय जबरदस्त झटका लगा, जब कट्टरपंथी यहूदी पार्टी यूनाइटेड तोरा जुडाइज़्म (UTJ) ने सत्तारूढ़ गठबंधन से नाता तोड़ लिया। पार्टी का आरोप है कि सरकार येशिवा छात्रों को सैन्य सेवा से छूट देने के अपने वादे पर कायम नहीं रही। गठबंधन से समर्थन वापस लेने के साथ ही UTJ के सात में से छह सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है, जिससे नेतन्याहू के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में बहुमत बनाए रखना मुश्किल हो गया है।
दरअसल, येशिवा छात्र वे होते हैं जो पारंपरिक यहूदी धार्मिक शिक्षा में रत रहते हैं और दुनिया के बाकी कामों से दूर रहते हैं। इजराइल में नए सुरक्षा कानूनों के तहत अब सभी नागरिकों के लिए कुछ वर्षों की अनिवार्य सैन्य सेवा को जरूरी कर दिया गया है। इसी दायरे में येशिवा छात्रों को भी शामिल कर लिया गया, जिससे अति-रूढ़िवादी धार्मिक समुदाय में असंतोष फैल गया। यूनाइटेड तोरा जुडाइज़्म, जो 2022 में नेतन्याहू के गठबंधन में इस शर्त पर शामिल हुई थी कि येशिवा छात्रों को छूट दी जाएगी, अब अपने को ठगा महसूस कर रही है।
UTJ के डेगेल हातोरा और अगुदत यिसरायल गुटों ने साफ कहा है कि सरकार ने बार-बार की गई प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है। पार्टी ने अपने प्रमुख रब्बियों से विचार-विमर्श के बाद गठबंधन से बाहर होने का निर्णय लिया। इससे पहले पार्टी प्रमुख यित्ज़ाक गोल्डकनॉफ़ भी एक महीने पहले इस्तीफा दे चुके हैं। अब इस राजनीतिक खींचतान में नेतन्याहू को नेसेट में मात्र 61 सीटों का कमजोर बहुमत रह गया है।
स्थिति और गंभीर तब हो सकती है यदि दूसरी कट्टर यहूदी पार्टी शास भी गठबंधन से बाहर हो जाए। शास के पास 11 सांसद हैं और अगर वह भी समर्थन वापस ले लेती है, तो नेतन्याहू सरकार अल्पमत में आ जाएगी और सरकार का गिरना तय माना जा रहा है। ये वही दल हैं जो सेना भर्ती विधेयक को लेकर लंबे समय से अपनी नाराजगी जता रहे थे, लेकिन अब यह नाराजगी कार्रवाई में बदल गई है।
इस घटनाक्रम से इजराइल की राजनीति में अस्थिरता बढ़ गई है। युद्धकाल में सरकार को स्थायित्व की ज़रूरत होती है, लेकिन येशिवा छात्रों को लेकर धार्मिक समूहों और सरकार के बीच तनातनी अब सीधे सत्ता की कुर्सी को हिला रही है। नेतन्याहू के सामने अब अपने पुराने सहयोगियों को मनाने और बहुमत बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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